Banarasi Saree Buying Guide: अगर आप बनारसी साड़ी खरीदने जा रही हैं, तो पहले इन 5 जरूरी शब्दों का मतलब जरूर जान लें। कतान, कढ़ुवा, शिकारगाह, मीनाकारी और सोना-रूपा जरी की सही जानकारी आपको बेहतर क्वालिटी की साड़ी चुनने और ठगी से बचने में मदद करेगी।

Banarasi Saree Buying Guide: शादी, त्योहार या किसी खास मौके पर बनारसी साड़ी पहनना हर महिला की पहली पसंद होती है। इसकी शाही बुनाई और रिच लुक इसे हमेशा ट्रेंड में बनाए रखते हैं। लेकिन जब बात बनारसी साड़ी खरीदने की आती है, तो दुकानदार कई ऐसे शब्द इस्तेमाल करते हैं जिनका मतलब हर किसी को नहीं पता होता। ऐसे में कई बार लोग महंगी कीमत चुकाने के बावजूद असली और सामान्य बनारसी साड़ी में फर्क नहीं समझ पाते। अगर आप भी बनारसी साड़ी खरीदने की सोच रही हैं, तो पहले इन 5 जरूरी शब्दों का मतलब जरूर जान लें। इससे सही साड़ी चुनना आसान होगा और आप समझदारी से अपने पैसे भी खर्च कर पाएंगी।

कतान

बनारसी साड़ी में सबसे ज्यादा सुनाई देने वाला शब्द कतान होता है। कई लोग इसे किसी डिजाइन का नाम समझ लेते हैं, जबकि यह साड़ी के फैब्रिक का प्रकार है। कतान शुद्ध रेशम के धागों को खास तरीके से ट्विस्ट करके तैयार किया जाता है, जिससे कपड़ा मजबूत होने के साथ-साथ बेहद मुलायम भी बनता है। अच्छी क्वालिटी का कतान सिल्क हाथ लगाने पर स्मूद, ठंडा और हल्का दानेदार महसूस होता है। इसकी प्राकृतिक चमक भी बाकी सिल्क फैब्रिक से अलग दिखाई देती है।

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शिकारगाह

अगर किसी बनारसी साड़ी पर हाथी, घोड़े, हिरण, शेर या पक्षियों जैसे बारीक मोटिफ बने हों, तो उसे शिकारगाह डिजाइन कहा जाता है। यह बनारसी बुनाई की सबसे खास और पारंपरिक शैलियों में से एक मानी जाती है। इस तरह की साड़ियों में पूरे पल्लू या बॉर्डर पर जंगल और शिकार से जुड़े दृश्य बेहद बारीकी से बुने जाते हैं। इन्हें तैयार करने में काफी समय और कुशल कारीगरी लगती है, इसलिए इनकी कीमत भी सामान्य बनारसी साड़ियों से अधिक होती है।

सोना-रूपा जरी

बनारसी साड़ी की असली पहचान उसकी जरी होती है। यदि दुकानदार सोना-रूपा जरी का जिक्र करे, तो इसका मतलब है कि साड़ी में सुनहरे और चांदी जैसे रंग की उच्च गुणवत्ता वाली जरी का इस्तेमाल किया गया है। ऐसी साड़ियों पर रोशनी पड़ने पर सुनहरी और सिल्वर चमक एक साथ दिखाई देती है, जिससे उनका लुक और भी रॉयल नजर आता है। खरीदारी करते समय केवल डिजाइन नहीं, बल्कि जरी की क्वालिटी के बारे में भी जरूर जानकारी लें।

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कढ़ुवा

कढ़ुवा बुनाई बनारसी साड़ी की सबसे बेहतरीन तकनीकों में गिनी जाती है। इसमें हर मोटिफ को अलग-अलग हाथ से बुना जाता है, जिससे डिजाइन साफ, उभरा हुआ और बेहद आकर्षक दिखाई देता है। इस तकनीक की खास बात यह है कि साड़ी के पीछे अतिरिक्त धागे नजर नहीं आते। कढ़ुवा बनारसी साड़ी तैयार करने में कई सप्ताह या कई महीनों तक का समय लग सकता है, इसलिए इसकी कीमत भी अपेक्षाकृत ज्यादा होती है।

मीनाकारी

मीनाकारी का नाम अक्सर गहनों में सुना जाता है, लेकिन बनारसी साड़ियों में भी यह तकनीक बेहद लोकप्रिय है। इसमें सुनहरी जरी के साथ लाल, हरे, नीले और पीले जैसे रंगों का खूबसूरत मेल देखने को मिलता है। रोशनी पड़ते ही ये रंग और जरी मिलकर साड़ी को शानदार और शाही लुक देते हैं। अगर आप किसी खास अवसर के लिए बनारसी साड़ी खरीद रही हैं, तो मीनाकारी वर्क वाली साड़ी बेहतरीन विकल्प हो सकती है।

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खरीदारी करते समय रखें इन बातों का ध्यान

बनारसी साड़ी खरीदते समय केवल उसकी खूबसूरती देखकर फैसला न करें। साड़ी का फैब्रिक, बुनाई की तकनीक, जरी की गुणवत्ता और फिनिशिंग को भी अच्छी तरह जांचें। जहां तक संभव हो, भरोसेमंद दुकान या प्रमाणित विक्रेता से ही खरीदारी करें और साड़ी से जुड़ी हर जानकारी खुलकर पूछें। सही जानकारी के साथ खरीदी गई बनारसी साड़ी न सिर्फ आपकी स्टाइल बढ़ाएगी, बल्कि लंबे समय तक आपकी अलमारी की शान भी बनी रहेगी।