सार

Premanand Maharaj: एक महिला ने प्रेमानंद जी महाराज से प्रश्न किया कि उसके पति की नियत अपनी ही बेटी पर खराब है। डर लग रहा है कि मुझे कुछ हो गया तो उसका क्या होगा। आइए जानते हैं महाराज जी ने क्या कहा।

Premanand Maharaj: मुझे कुछ हो जाता है तो कौन उसे संभालेगा, उसकी रक्षा करेगा ये चिंता लगी रहती है, ये लाइन एक मां की है। जिस पिता के साये में एक बेटी खुद को सुरक्षित महसूस करती है, उसी पिता से उस मां को डर है। महिला ने अपना दर्द प्रेमानंद महाराज जी के सामने रखा। उसने बताया कि उसके पति की नियत खराब है। वो अपनी बेटी पर ही बुरी नजर रखता है।

सुनकर हैरान हुई ना, प्रेमानंद महाराज भी इस प्रश्न को सुनकर परेशान हो गए। उन्होंने कहा कि ये बड़ा विचारणीय विषय है। जब रक्षक ही भक्षक सृष्टि में हो जाए तो क्या होगा। एक पिता ही अपनी पुत्री पर अगर गलत दृष्टि रखें तो फिर किसी शरण में जाएगी वो।ये कैसा राक्षस पिता है जो अपनी पुत्री पर गंदी नजर रखे हुए है। बेटी पिता का अंश होती है, वो हमारा अंश है उसके साथ कैसे हम ऐसे। जो राक्षस प्रवृत्ति के हैं ना जिन्होंने भजन नहीं किया, धर्म और भगवान का भय नहीं वैसे राक्षसों के लिए कानून बना है।

पति को जेल में भेज दो!

प्रेमानंद महाराज ने आगे कहा कि ऐसे राक्षसों को जेल में होना चाहिए, घर में नहीं होना चाहिए। ऐसे ममता करोगी अपने पति के प्रति को ठीक नहीं होगा। अगर वो राक्षस है तो राक्षसों की जगह जेल में है। ऐसे लोगों को वहां भेजो। तो महिला कहती है कि वो अपने पति से अलग रह रही है, ताकि बेटी सुरक्षित रहे। जिस पर प्रेमानंद जी कहते हैं कि फिर तो अच्छी बात है वो सुरक्षित रहेगी और भगवान रक्षा करने के लिए हैं।

 

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वाकई आप सोच सकते हैं कि एक पत्नी और बेटी पर क्या गुजरती होगी कि उसका खेवनहार ही उसे डूबोने वाला है। महाराज जी भी कहते हैं कि ये सोचकर कलेजा कांप जाता है कि कोई इतना बड़ा पाप कैसे कर सकता है। पर जब बुद्धि ही भ्रष्ट हो जाए तो कोई कुछ भी कर सकता है।