Reddit Story: माता-पिता की अचानक मौत किसी भी इंसान के व्यवहार और सोच को पूरी तरह बदल सकती है, जिसका असर उनके रिश्तों पर भी पड़ सकता है। यह आर्टिकल बताता है कि कैसे दुख, ट्रॉमा और सपोर्ट की कमी रिश्तों में तनाव पैदा कर सकते हैं और…

Relationship: किसी अपने की अचानक मौत इंसान की जिंदगी को पूरी तरह बदल देती है। जब यह दर्द पति या पत्नी या पार्टनर को होता है, तो इसका रिश्ते पर बहुत गहरा असर पड़ता है। अक्सर लोग उन लोगों के दुख को समझने की कोशिश करते हैं जिन्होंने अपनों को खोया है, लेकिन वे यह भूल जाते हैं कि जो पार्टनर लगातार सहारा दे रहा है, वह भी अंदर से टूट रहा हो सकता है। यह ऐसे ही एक रिश्ते की कहानी है, जहां प्यार तो है, लेकिन उम्मीद धीरे-धीरे खत्म हो रही है।

दुख और सदमा इंसान को बदल देते हैं

माता-पिता की मौत के बाद दुख होना स्वाभाविक है, लेकिन जब यह दुख लंबे समय तक पूरी जिंदगी पर हावी हो जाता है, तो यह चिंता का कारण बन जाता है। इस मामले में, मंगेतर का व्यवहार सिर्फ मातम से कहीं ज्यादा था। ड्रग्स का इस्तेमाल, खुद से नफरत, तेजी से वजन बढ़ना, निराशा और सामाजिक अलगाव। ये सभी गहरे मानसिक तनाव और डिप्रेशन के संकेत हैं। ऐसा लगता है कि वह दर्द को समझने और स्वीकार करने के बजाय उससे भागने की कोशिश कर रहा है।

जब मदद ठुकरा दी जाती है

पार्टनर ने हर मुमकिन कोशिश की थेरेपी, कपल्स काउंसलिंग, इमोशनली और फीजिकली सहारा। लेकिन जब दूसरा व्यक्ति दी गई मदद का मजाक उड़ाता है और कहता है, "मुझे सब पता है," तो रिश्ता बराबरी का नहीं रह जाता। धीरे-धीरे, यह एक ऐसे रिश्ते में बदल जाता है जहां एक व्यक्ति सिर्फ दे रहा है और दूसरा सिर्फ ले रहा है। यह स्थिति लंबे समय तक किसी के लिए भी ठीक नहीं है।

जिंदगी के जरूरी पहलुओं में दिलचस्पी न होना

लगातार नजरअंदाज़ करना, भावनात्मक दूरी, शारीरिक नजदीकी की कमी, और पार्टनर की जिंदगी के जरूरी पहलुओं में दिलचस्पी न होना- ये सब एक इंसान को थका सकते हैं। ऐसी स्थिति में, गुस्सा, दूरी, या आकर्षण में कमी गलत या क्रूर नहीं है, बल्कि यह एक मानवीय प्रतिक्रिया है। किसी के दुख को समझना जरूरी है, लेकिन अपनी पूरी जिंदगी और पहचान को कुर्बान करना सही नहीं है। अपनी मानसिक सेहत की रक्षा करना स्वार्थ नहीं है।

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क्या है लोगों की राय

रेडिट पर लड़की ने अपनी स्टोरी शेयर की जिसपर लोगों ने अपनी राय देते हुए कहा कि मेरे पापा की मौत के बाद घर से बाहर निकलने में मुझे 6 महीने लग गए, अगर मेरे दोनों माता-पिता इतने कम समय में एक-दूसरे के बाद गुजर जाते तो मैं पागल हो जाता। इस साल मेरे पापा की मौत की 9वीं सालगिरह है और मैं आज भी उनके लिए रोता हूं। एक अनय यूजर ने कहा कि आपके रिश्ते में एक भयानक हादसा हुआ है, और यह इतना मज़बूत नहीं है कि इससे उबर सके। मैं यह समझता हूं, सच में। आप 26 साल की हैं, अपनी जिंदगी और भविष्य शुरू करने के लिए तैयार हैं और वह नहीं है। आप तय कर सकती हैं कि आप इसे जारी रखना चाहती हैं या नहीं, आप पर बिल्कुल कोई दबाव नहीं है। आपकी शादी नहीं हुई है। आप कभी भी जाने के लिए आजाद हैं।

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