Premananda Ji Maharaj Tips:कई बार हम रिश्तों में ऐसे फंस जाते हैं, जिनसे निकल पाना मुश्किल हो जाता है। कुछ ऐसा ही एक बेटे के साथ हुआ, जो यह समझ नहीं पा रहा था कि मां को सताने वाले पिता के साथ वह क्या करे। प्रेमानंद जी महाराज ने उसे राह दिखाई।

Relationship Tips: मैरेज लाइफ तभी सक्सेस और हैप्पीनेस से भरा होता है, जब पति-पत्नी के बीच आपसी समझ, सम्मान और प्यार हो। एक-दूसरे की मदद करना, हर समस्या को मिलकर सुलझाना और परिवार को आगे बढ़ाना ही रिश्ते की खूबसूरती है। लेकिन कई घरों में हालात बिल्कुल उलट होते हैं। पति-पत्नी साथ रहते हैं पर मनमानी करते हैं, आपस में बातचीत तक बंद हो जाती है और कभी-कभी तो पति पत्नी पर हाथ भी उठा देता है। शराब पीकर मारपीट करना, दुर्व्यवहार करना जैसी बातें पत्नी को अंदर ही अंदर तोड़ देती हैं। अक्सर मां बच्चे की खातिर सब सहती रहती है, लेकिन जब बच्चे बड़े हो जाते हैं तो सवाल खड़ा होता है कि उन्हें क्या करना चाहिए?

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सवाल- पिता मेरे मां के साथ करते हैं गलत व्यवहार

इसी विषय पर एक बेटे ने प्रेमानंद जी महाराज से प्रश्न किया। 28 साल के युवक ने कहा कि मेरे पिता मेरी मां को बहुत मारते हैं, दुर्व्यवहार करते हैं। मुझे ऐसी स्थिति में क्या करना चाहिए?

जवाब-बेटे को मां का साथ देना चाहिए

इस पर महाराज जी ने स्पष्ट कहा, 'पति का पत्नी के साथ अमानवीय व्यवहार किसी भी कीमत पर उचित नहीं है। कभी-कभी कटु शब्द कहना अलग बात है, लेकिन पत्नी को जानवर की तरह पीटना या अपमानित करना घोर अधार्मिक कर्म है। ऐसी स्थिति में बेटे को हमेशा मां का साथ देना चाहिए।

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पिता का दुष्ट स्वभाव नहीं बर्दाश्त करें

उन्होंने आगे कहा, 'मां पहली है और पिता दूसरे स्थान पर। मां पहली गुरु है और पिता दूसरे। यदि पिता का आचरण धर्म के विरुद्ध है, तो बेटे को कभी भी उनका साथ नहीं देना चाहिए।' महाराज जी ने आगे समझाया कि यदि बेटा बड़ा हो चुका है, तो अब उसे मां की रक्षा और सेवा करनी चाहिए। पिता के दुष्ट स्वभाव को सहन करना उचित नहीं। यदि मां भी ऐसे व्यक्ति के साथ नहीं रहना चाहती, तो यह निर्णय अपने आप मां और बेटे के पक्ष में है।

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बेटे को भी मां के साथ गलत व्यवहार नहीं करना चाहिए: प्रेमानंद महाराज

हालांकि, यदि भविष्य में पिता बूढ़े और बीमार हो जाएं, तो उनकी सेवा करना भी बेटे का कर्तव्य है। लेकिन जब तक वह पत्नी के साथ दैत्य जैसा व्यवहार करते हैं, तब तक बेटे को मां का ही साथ देना चाहिए। अंत में महाराज जी ने कहा, 'एक युवा बेटे को कभी भी अपनी मां के प्रति पिता के गलत व्यवहार को सहन नहीं करना चाहिए। मां की सेवा और रक्षा करना ही सबसे बड़ा धर्म है।'

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