'मेनो-डिवोर्स' 45-65 साल की महिलाओं द्वारा मेनोपॉज के दौरान तलाक लेने का चलन है। यह सीधे तौर पर कारण नहीं, बल्कि रिश्ते की पुरानी समस्याओं का ट्रिगर बनता है, जिससे महिलाएं नाखुश शादी से निकलकर अपनी खुशी को प्राथमिकता देती हैं। 

Meno-Divorce In Trend: आपने 'ग्रे डिवोर्स' और 'साइलेंट डिवोर्स' जैसे शब्द हाल-फिलहाल में सुने होंगे। अब इसी लिस्ट में एक नया शब्द जुड़ गया है - 'मेनो-डिवोर्स'। यह शब्द अधेड़ उम्र के कपल्स के बीच काफी ध्यान खींच रहा है। स्टडीज बताती हैं कि 45 से 65 साल की उम्र के बीच, खासकर महिलाएं, अपनी लंबी चली आ रही शादियों को खत्म कर रही हैं और यह चलन बढ़ रहा है।

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'मेनो-डिवोर्स' आखिर है क्या?

'मेनो-डिवोर्स' का मतलब है मेनोपॉज (रजोनिवृत्ति) या पेरिमेनोपॉज के दौर से गुजर रही महिलाओं का अपनी शादी को तोड़कर तलाक लेने का फैसला। यह सिर्फ रिश्ते में आई दरार नहीं है, बल्कि यह इस बात का संकेत है कि महिलाएं अपनी ज़िंदगी की प्राथमिकताओं, पहचान और खुशी के बारे में फिर से सोच रही हैं।

यह ट्रेंड क्यों बढ़ रहा है?

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, मेनोपॉज सीधे तौर पर तलाक की वजह नहीं है। लेकिन यह उन समस्याओं को और गंभीर बना देता है, जो सालों से रिश्ते में मौजूद थीं। इसकी कुछ मुख्य वजहें ये हैं:

-हॉर्मोन में होने वाले बदलाव: अधेड़ उम्र में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हॉर्मोन का लेवल कम हो जाता है। इसकी वजह से नींद न आना, घबराहट, चिड़चिड़ापन और मूड बदलना जैसी समस्याएं होती हैं, जो शादीशुदा ज़िंदगी में तनाव बढ़ा सकती हैं।

- 'ज़िंदगी का फिर से आकलन' करने का दौर: जब बच्चे बड़े होकर पढ़ाई या नौकरी के लिए घर से बाहर चले जाते हैं, तो कपल्स अपने रिश्ते को एक नए नजरिए से देखते हैं। तब यह सवाल उठता है कि, “क्या यह रिश्ता अब भी मेरे लिए सही है?”

-सालों की नाराजगी का बाहर आना: बातचीत की कमी, जिम्मेदारियों का बराबर न बंटना और इमोशनल दूरी जैसी बातें, जो सालों से नजरअंदाज की जा रही थीं, अधेड़ उम्र में आकर 'डील ब्रेकर' बन सकती हैं।

- महिलाओं की बढ़ती आज़ादी: आज के समाज में महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हैं। साथ ही, तलाक को लेकर पहले जैसी हिचक भी नहीं रही। इस वजह से महिलाएं 'बिना खुशी वाली शादी' से बाहर निकलने का फैसला ले पा रही हैं।

स्टडी में सामने आया सच

एक स्टडी में पाया गया है कि 45-55 की उम्र में तलाक की दर सबसे ज़्यादा है। यह भी देखा गया है कि अधेड़ उम्र में होने वाले 60% से ज़्यादा तलाक की पहल महिलाएं ही करती हैं। कुछ सर्वे में तो 70% से ज़्यादा महिलाओं ने माना कि मेनोपॉज भी इसकी एक वजहों में से था।

भारत में भी तस्वीर कुछ ऐसी ही है। हालांकि भारत में तलाक की दर कम है, लेकिन अधेड़ उम्र की महिलाओं में यह ट्रेंड धीरे-धीरे बढ़ रहा है। यह सामाजिक बदलाव और महिलाओं की स्वतंत्र सोच को दिखाता है।

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क्या कहते हैं एक्सपर्ट 

एक्सपर्ट्स का कहना है कि मेनोपॉज एक “ट्रिगर” हो सकता है, लेकिन असली वजह नहीं। मेनोपॉज पुरानी समस्याओं को बड़ा बनाकर दिखा देता है और महिलाओं को अपनी ज़िंदगी को लेकर एक नई स्पष्टता देता है। इसलिए, कुछ लोगों के लिए यह रिश्ते का अंत होता है, तो कईयों के लिए एक नई शुरुआत।

'मेनो-डिवोर्स' सिर्फ एक फैशनेबल शब्द नहीं है। यह अधेड़ उम्र की महिलाओं की सोच में आ रहे एक बड़े बदलाव का संकेत है। उनके लिए अब सिर्फ शादी बचाना ही लक्ष्य नहीं है, बल्कि एक खुशहाल और सम्मानजनक ज़िंदगी जीना ज़्यादा ज़रूरी है। अधेड़ उम्र ज़िंदगी का अंत नहीं, बल्कि कई लोगों के लिए एक नई ज़िंदगी की शुरुआत है।

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