बार-बार गलत पार्टनर चुनना किस्मत नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक है। बचपन के अनुभव हमें अनजाने में परिचित लेकिन गलत रिश्तों की ओर खींचते हैं। आत्म-विश्लेषण और आत्म-सम्मान से इस चक्र को तोड़ा जा सकता है।
बेंगलुरु: जब कोई नया रिश्ता शुरू होता है, तो शुरुआत में सब कुछ बहुत अच्छा लगता है। लेकिन जैसे-जैसे दिन बीतते हैं, वही पुरानी कहानी दोहराने लगती है। पार्टनर का बर्ताव बदल जाता है, एक-दूसरे को समझना मुश्किल हो जाता है और आखिर में मनमुटाव इतना बढ़ता है कि रिश्ता ही टूट जाता है। अगर आपकी ज़िंदगी में भी बार-बार ऐसा हो रहा है, तो यह आपकी खराब किस्मत नहीं है। साइकोलॉजिस्ट्स यानी मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि इसके पीछे आपकी मानसिकता और बचपन के अनुभव हो सकते हैं। आइए समझते हैं कि ऐसा क्यों होता है।
हम गलत पार्टनर क्यों चुनते हैं?
साइकोलॉजी के मुताबिक, बचपन में हम घर पर जैसा माहौल देखते हैं, वही हमारे आने वाले रिश्तों के लिए एक ब्लूप्रिंट यानी खाके की तरह काम करता है। जो बच्चे अपने माता-पिता के बीच प्यार और सम्मान देखकर बड़े होते हैं, वे बड़े होकर अपने पार्टनर में भी वही गुण ढूंढते हैं। लेकिन, जिन्होंने बचपन में लड़ाई-झगड़े और प्यार की कमी वाला माहौल देखा है, वे अनजाने में ही वैसे ही मुश्किल रिश्तों की तरफ खिंचते चले जाते हैं।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि हमारा दिमाग हमेशा जानी-पहचानी फीलिंग्स की तरफ ही भागता है। अगर आपने बचपन में घर पर झगड़े, चीख-पुकार और प्यार की कमी देखी है, तो आपके दिमाग के लिए वही अशांत माहौल 'नॉर्मल' बन जाता है। इसीलिए, जब आप बड़े होते हैं और कोई आपसे प्यार और सम्मान से पेश आता है, तो आपको शायद वो बोरिंग लगने लगे। आपको पता भी नहीं चलता और आपका मन पुराने जख्मों की याद दिलाने वाले गुस्सैल या इमोशनली दूर रहने वाले लोगों की तरफ आकर्षित होने लगता है।
सच तो यह है कि कई बार हमें खुद पर ही भरोसा नहीं होता। 'क्या मैं सच्चे प्यार और सम्मान के लायक हूं?' यह गलतफहमी हमें अंदर ही अंदर परेशान करती रहती है। इसी वजह से, हम उन लोगों को भी बर्दाश्त करने लगते हैं जो हमारे साथ ठीक से बर्ताव नहीं करते। यह एक दुष्चक्र यानी Vicious Cycle की तरह है। आत्मविश्वास जितना कम होता है, गलत रिश्ते में पड़ने की आशंका उतनी ही बढ़ जाती है।
इस चक्र से बाहर कैसे निकलें?
इस चक्र से बाहर निकलने के लिए सबसे पहले आपको अपने पुराने रिश्तों का विश्लेषण करना होगा। आपको यह समझना होगा कि आप कैसे लोगों को चुनते रहे हैं और कौन-सी गलतियां बार-बार हो रही हैं। जरूरत पड़े तो दोस्तों या किसी मनोवैज्ञानिक की मदद लें। मनोवैज्ञानिक सलाह देते हैं कि सबसे जरूरी है खुद से प्यार करना और अपनी इज्जत करना सीखना। जब आप ऐसा कर पाएंगे, तभी आपको एक सही पार्टनर चुनने का मौका मिलेगा।
