Spiti Valley Itinerary 7 Days: सर्दियों की शुरुआत हो चुकी है और ऐसे में ऑफिस से छुट्टी लेकर कहीं बाहर जाने का बना रहे हैं, प्लान तो पहुंचें हिमाचल की स्पीति वैली। यहां की खूबसूरती इतनी कि पता नहीं चलेगा कि सात दिन कैसे बीत गया।

सर्दियों के साथ लोगों की घूमने फिरने की प्लानिंग शुरू हो जाती है। सर्दियों में अक्सर लोग पहाड़ों की ओर ठंड और बर्फबारी का मजा लेने पहुंचे हैं। ऐसे में अगर आप भी बर्फ से ढकी पहाड़ियों, शांत मठों और नेचर की खूबसूरती के बीच कुछ दिन छुट्टी मनाने का सोच रहे हैं, तो स्पीति वैली से बेहतर जगह कोई नहीं। हिमाचल प्रदेश की गोद में बसी स्पीति वैली हर ट्रैवलर के लिए किसी जन्नत से कम नहीं। नवंबर से लेकर मार्च तक यहां की बर्फबारी इस जगह को स्वर्ग सी सुंदर बना देती है। इस बार नवंबर दिसंबर में ऑफिस से छुट्टी लेकर कहीं शांत जगह पर कुछ वक्त बिताना चाहते हैं, तो चलिए जानते हैं 7 दिन की परफेक्ट स्पीति वैली इटिनेररी, जिसमें एडवेंचर, नेचर और कल्चर, तीनों का मजा लेंगे एक साथ।

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पहला दिन चंडीगढ़ से नारकंडा तक सफर

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आपकी इस ट्रिप की शुरुआत चंडीगढ़ से होगी। सुबह जल्दी निकलना सबसे अच्छा रहेगा ताकि पहाड़ी रास्तों का आनंद लेते हुए शाम तक आप नारकंडा पहुंच जाएं। नारकंडा एप्पल ऑर्चर्ड्स और बर्फ से ढकी पहाड़ियों के लिए जाना जाता है। यहां की ठंडी हवा और शांत माहौल आपका पूरा थकान मिटा देगा। शाम को लोकल मार्केट घूमें या हाटू पीक से सन सेट का खूबसूरत नजारा देखें।

दूसरा दिन नारकंडा से संगीला

दूसरे दिन का सफर थोड़ा लंबा होगा लेकिन नजारे आपको यहां रुकने पर मजबूर करेंगे। रास्ते में सतलुज नदी के किनारे बहते ठंडे झरने और हरियाली से ढकी घाटियां आपका मन मोह लेंगी। संगीला पहुंचने पर आप कामिक और रक्चम गांवों के लोगों की सिंपल लाइफस्टाइल देखें। यहां की बासपा वैली फोटोग्राफरों के लिए किसी जन्नत से कम नहीं।

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तीसरा दिन संगीला से हरलिंग तक

तीसरे दिन आप किन्नौर से होते हुए हरलिंग की ओर बढ़ेंगे। यह एक छोटा सा गांव है जो अब तक ट्रेवलर की भीड़ से बचा हुआ है। रास्ते में आपको पुराने मठ और चट्टानों पर उकेरी गई प्राचीन मूर्तियां देखने को मिलेंगी। यहां रात बिताना आपको खास और अलग एक्सपीरियंस देगा। तारों से सजे आसमान के नीचे शांति और नेचर की आवाज जिंदगी की सारी चिंताएं और परेशानी मिटा देगी।

चौथा दिन हरलिंग से काजा

स्पीति वैली का दिल कहे जाने वाले काजा की ओर सफर चौथे दिन शुरू होगा। रास्ते में ताबो और ढंकर मठ जैसी ऐतिहासिक जगहें हैं जिन्हें देखकर आपको अलग ही एक्सपीरियंस होगा। काजा पहुंचने पर आप बर्फ से ढकी चोटियों के बीच बसा यह छोटा लेकिन खूबसूरत कस्बा देख सकते हैं। यहां का लोकल मार्केट घूमना और हिमालयन कैफे में गर्म मोमो या थुकपा का स्वाद जरूर चखें।

पांचवा दिन काजा साइटसीइंग

पांचवां दिन पूरी तरह काजा और उसके आसपास की जगहों को देखने के लिए रखें। की मोनेस्ट्री और किब्बर गांव जरूर जाएं, जो दुनिया के सबसे ऊंचे बसे गांवों में से एक है। इसके अलावा लांगजा, हिक्किम और कोमिक जैसे गांव आपको हिमालय की ऊंचाइयों पर बसे पुराने लाइफस्टाइल से रूबरू कराएंगे। हिक्किम पोस्ट ऑफिस से खुद को एक पोस्टकार्ड भेजना इस सफर की एक खूबसूरत मेमोरी बनाएगी।

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छठवां दिन काजा से काल्पा की ओर

छठे दिन आप काजा से वापसी की ओर बढ़ेंगे और किन्नौर जिले के काल्पा पहुंचेंगे। काल्पा का नजारा इतना सुंदर है कि हर मोड़ पर रुकने का मन करेगा। यहां से आप किन्नर कैलाश पर्वत को नजदीक से देख सकते हैं, जो बर्फ से ढकी चोटी के रूप में चमकती रहती है। शाम को लोकल बाजार में घूमना और तिब्बती फूड का स्वाद लेना सफर का बेस्ट मेमोरी हो सकता है।

सातवां दिन काल्पा से चंडीगढ़ (ड्रॉप)

सातवें दिन आपका ये यादगार सफर पूरा होगा। सुबह काल्पा की ताजा हवा में एक कप गर्म चाय पीते हुए इस यात्रा की यादें अपने दिल में बसाएं और फिर वापसी के लिए चंडीगढ़ की ओर रवाना हो।