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बड़ा दिलचस्प है MP की इस सीट का चुनाव, क्योंकि आमने-सामने हैं समधी-समधन..कभी दोनों एक पार्टी में थे

उपचुनाव को लेकर मध्य प्रदेश की सियासत जोरों पर है। बीजेपी और कांग्रेस हर हाल में इस चुनाव को जीतना चाहती है। इन 28 सीटों पर होने वाले मुकाबले में एक सीट ऐसी है जहां पर बड़ा ही दिलचस्प मुकबला होने जा रहा है। क्योंकि यहां समधी-समधन आमने सामने हैं।

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Dabra, First Published Oct 4, 2020, 2:33 PM IST
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डबरा (मध्य प्रदेश). उपचुनाव को लेकर मध्य प्रदेश की सियासत जोरों पर है। बीजेपी और कांग्रेस हर हाल में इस चुनाव को जीतना चाहती है। जहां सीएम शिवराज अपनी सत्ता बचाने के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ वापस सरकार बनाने के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। इन 28 सीटों पर होने वाले मुकाबले में कई ऐसी सीटें हैं जहां पर बड़ा ही दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल रहा है। इन्हीं में एक सीट डबरा विधानसभा है, जहां पर चुनाव जीतने के लिए समधी-समधन एक-दूसरे के आमने सामने मैदान में हैं।

समधी-समधन में 7 साल बाद दिलचस्प मुकाबला
डबरा सीट पर कांग्रेस ने सुरेश राजे को अपना प्रत्याशी बनाया है। वहीं सत्ताधारी पार्टी बीजेपी की तरफ से शिवराज सरकार की मंत्री इमरती देवी को यहां से उम्मीदवार बनाया गया है। बता दें कि दोनों समधी-समधन के बीच सात साल पहले 2013 में भी ऐसा मुकाबला हो चुका है। BJP ने सुरेश को अपनी समधन कांग्रेस की इमरती देवी के सामने उतारा था। जहां BJP ने सुरेश को अपनी समधन कांग्रेस की इमरती देवी के सामने उतारा था. लेकिन इमरती देवी ने समधी यानि सुरेश कड़ी शिकस्त दी थी।

ये रिश्ता है दोनों नेताओं के बीच
सुरेश राजे और इमरती देवी के रिश्ते में समधी-समधन लगते हैं। बता दें कि सुरेश के बड़े भाई के बेटे की तरफ इमरती देवी के भाई की बेटी की शादी हुई है। इस रिश्ते से दोनों नेता आपस में समधी-समधन होते हैं। दिलचस्प बात यह है कि कांग्रेस के सुरेश गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को अपना राजनीतिक गुरु मनाते हैं। जब वह भाजपा में थे तो मिश्रा से ही 38 साल तक राजनीति के दांव-पेंच सीखे हैं। अब वही गुरू उनके खिलाफ प्रचार कर रहे हैं।

दो साल पहले समधन का किया था प्रचार
बता दें कि दो साल साल 2018 में सुरेश राजे को भारतीय जनता पार्टी ने नजर अंदाज किया तो उन्होंने बीजेपी पार्टी छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया था। इस दौरान 2018 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने अपनी समधन इमरती देवी के लिए जबरदस्त प्रचार-प्रसार किया था। जिसके चलते इमरती देवी को 57 हज़ार की शानदार जीत मिली थी।

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