मध्यप्रदेश के रीवा शहर से स्वास्थ्य विभाग की एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। जहां एक सरकारी अस्पताल के स्टाफ ने सारी हदें पार कर दीं। इलाज के दौरान एक 22 साल के एक युवक की मौत हो गई, लेकिन परिजनों को 65 साल के एक बुजुर्ग का शव सौंप दिया। 

रीवा. मध्यप्रदेश के रीवा शहर से स्वास्थ्य विभाग की एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। जहां एक सरकारी अस्पताल के स्टाफ ने सारी हदें पार कर दीं। इलाज के दौरान एक 22 साल के एक युवक की मौत हो गई, लेकिन परिजनों को 65 साल के एक बुजुर्ग का शव सौंप दिया।

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जवान बेटे की जगह थमा दिया बुजुर्ग का शव
दरअसल, कुछ दिन पहले 22 साल के विवेक की तबीयत खराब हो गई थी। घरवालों ने उसे लेकर संजय गांधी अस्पताल पहुंचे थे, डॉक्टरों ने हालत ज्यादा खराब होने के चलते युवक को आईसीयू एडमिट कर दिया था। इसके बाद डॉक्टरों ने युवक को कोविड सेंटर में रेफर कर दिया परिजनों को बिना बताए। युवक के पिता ने कहा कि की बेटे को बदन दर्द की शिकायत थी जिसे भर्ती किया था। लेकिन अस्पताल ने उसको कोरोना वार्ड में रेफर कर दिया।

बेटे का शव देखते ही दंग रह गए पिता
भर्ती होने के तीन तार दिन बाद जब युवक के परिजनों ने उसकी हालत के बारे में पूछा तो डॉक्टरों ने कहा-उसकी तो इलाज के दौरान मौत हो गई। इसके बाद शव को सौंप दिया, जब पिता ने बैग में रखे बेटे के शव को देखा तो वे दंग रह गए, क्योंकि उसमें 65 साल के एक व्यक्ति का शव रखा हुआ था। इसके बाद परिजनों ने अस्पताल के खिलाफ जमकर हंगामा किया। 

अस्पातल के डॉक्टरों को किया सस्पेंड
मृतक युवक के परिजनों ने इस मामले की शिकायत पुलिस और कलेक्टर ऑफिस में जाकर की और हंगामा किया। साथ प्रशासन से जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग रखी। इसके बाद लापरवाही की घटना के उजागर होते ही प्रशासन हरकत में आया और अस्पताल के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. राकेश पटेल के साथ अन्य स्टाफ को सस्पेंड कर दिया। इसके अलावा प्रशासन यह पता लगा रहा है कि मृतक कोरोना पॉजिटव था या नहीं। वहीं मामले में कॉलेज के डीन डॉ. एपीएस गहरवार ने माना कि लापरवाही हुई है, बैग का टैग बदल जाने से शव बदल गया और शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया।