ग्वालियर में एक लेडी सब इंस्पेक्टर ने अपनी ड्यूटी निभाते वक्त एक युवक को मौत के मुंह से बचा लिया। मध्य प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने खुद वीडियो कॉल कर महिला पुलिसकर्मी की तारीफ करते हुए कहा-बेटा आज तुमने माता-पिता और विभाग का नाम रोशन कर दिया है।

ग्वालियर. मध्य प्रदेश की एक महिला पुलिस कर्मी ने जो इंसानियत की मिसाल पेश की है, उसका हर कोई कायल हो गया है। कैसे एक राहगीर को जब हार्ट अटैक आया तो लेडी इंस्पेक्टर ने अपनी सूझबूझ से उसकी जान बचा ली। अगर जरा सी भी देरी होती तो युवक की मौत भी हो सकती थी। ये बात सामने आने के बाद अब लोग लेडी पुलिस ऑफिसर की तारीफ कर रहे हैं। खुद प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने वीडियो कॉल कर बहादुरी को सलाम किया।

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जब राह चलते युवक बेसुध होकर गिर पड़ा...
दरअसल, यह मामला ग्वालियर के गोले मंदिर रोड पर सोमवार को देखने के मिला। जब लेडी सब इंस्पेक्टर सोनम पाराशर अपनी ड्यूटी पर तैनात थीं। इसी दौरान राह चलते एक बुजुर्ग व्यक्ति को हार्ट अटैक आ गया और वह जमीन पर गिर पड़ा। इसके बाद वहां पर भीड़ जमा हो गई। कोई समझ नहीं पा रहा था कि आखिर क्या किया जाए। कुछ लोग पुलिस को कॉल करने लगे तो कुछ वीडियो बनाने लगे।

लेडी पुलिस ने डॉक्टर की तरह ट्रीटमेंट देकर बचाई जिंदगी
घटनास्थल के पास तैनात ट्रैफिक सूबेदार सोनम को जब पता चला तो वह दौड़ी-दौड़ी वहां पहुंची। इसके बाद सोनम बिना देर किए उस शख्स के सीने पर हाथ रखकर पुश करने लगीं। इतना ही नहीं एक डॉक्टर की तरह CPR यानि कार्डियो पल्मोनरी रेसुसिएशन दिया। इससे शरीर में ब्लड और ऑक्सीजन का सर्कुलेशन बेहतर होने लगा और वह युवक होश में आ गा। फिर सोनम ने डायल 100 की मदद से युवक को अस्पताल पहुंचाया। इसके बाद लेडी पुलिस अफसर ने उसके मोबाइल से बेटे का नंबर निकाला और कॉल कर घटना के बारे में बताया।

युवक बोला-एसआई ने मुझे जीवनदान दिया है...वो नहीं होती तो मैं नहीं होता
बता दें कि हार्ट अटैक आने वाले युवक की पहचान अनिल उपाध्याय रूप में की गई है। वह सरकारी नौकरी से रिटार्यड हैं, पुलिस अफसर ने युवक को ग्वालियर के अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया था। लेकिन अस्पताल में कुछ देर इलाज के बाद वह सामान्य हो गए। शाम को उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया है। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि यह मेरा दूसरा जीवन है, अगर एसआई सोनम वहां पर मेरी मदद नहीं करती तो शायद जिंदा नहीं होती। वहीं अनिल उपाध्याय कहा कि हमें पुलिस ट्रेनिंग में सिखाया जाता है कि यदि कोई इस तरह का केस आ जाए तो उसकी जिंदगी हम सीपीआर देकर बचा सकते हैं।


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