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हिंदुत्व बचाने के नाम पर बागी हुए 20 से अधिक MLAs NCP के, संजय राउत बोले-बैल बदलने का समय आया

Maharashtra Political Crisis महाराष्ट्र में राजनीतिक संकट लगातार जारी है। शिवसेना से बगावत करने वाले विधायक लगातार यह दावा करते नजर आ रहे हैं कि वह हिंदुत्व को बचाने के लिए पार्टी तोड़े हैं। बागियों पर पलटवार करते हुए संजय राउत ने कहा कि जो हिंदुत्व बचाने का दावा कर रहे हैं उन बागियों में 20 से अधिक विधायक पहले एनसीपी में ही थे। 

Sanjay Raut slammed rebel Shiv Sena MLAs, said those claiming fight to protect Hindutva were earlier with NCP, DVG
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Mumbai, First Published Jun 28, 2022, 6:33 PM IST

Maharashtra Political Crisis शिवसेना के बागी विधायकों के हिंदुत्व बचाने के लिए बगावत करने वाले दावे पर संजय राउत (Sanjay Raut slammed rebel Shiv Sena MLAs) ने पलटवार किया है। शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा कि जो लोग हिंदुत्व की लड़ाई लड़ने की बात कह रहे हैं, उसमें से आधे से अधिक एनसीपी से आए हैं। जब एनसीपी में थे तो कौन से हिंदुत्व की रक्षा करते थे।

मुंबई के पास अलीबाग में एक जनसभा में राउत ने कहा कि एकनाथ शिंदे का समर्थन करने वाले बागी विधायक कह रहे हैं कि उनका मकसद पार्टी संस्थापक बालासाहेब ठाकरे द्वारा परिकल्पित हिंदुत्व की रक्षा करना है। उन्होंने कहा कि बगावत करने वालों में से बीस राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से आए हैं। वे किस हिंदुत्व की बात कर रहे हैं? बालासाहेब ठाकरे का विरोध करने वालों ने अपना करियर बर्बाद कर लिया।

अलीबाग विधायक पर भी किया वार

राउत ने अलीबाग से पार्टी विधायक महेंद्र दलवी, जो शिंदे खेमे में शामिल हो गए हैं, पर भी पलटवार किया। राउत ने कहा कि जब मैंने महेंद्र को फोन किया, तो उसने कहा कि वह आराम कर रहा है और उसने फोन काट दिया। वह पहले एनसीपी और अन्य राजनीतिक दलों जैसे किसान और श्रमिक पार्टी के साथ था। मुझे लगता है कि यह बैल बदलने का समय है।

गुवाहाटी में डेरा डाले हैं बागी

शिंदे गुट के अनुसार, जो गुवाहाटी में डेरा डाले हुए है, उसे शिवसेना के 55 में से 40 विधायकों का समर्थन प्राप्त है। बता दें कि कई बागी विधायकों के साथ-साथ उनके नेता और महाराष्ट्र के वरिष्ठ मंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा है कि उन्होंने शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे के समान विचारधारा वाली भाजपा से नाता तोड़ने और राकांपा और कांग्रेस से हाथ मिलाने के फैसले को स्वीकार नहीं किया।

क्यों मचा है बवाल?

दरअसल, बीते दिनों शिवसेना के सीनियर लीडर एकनाथ शिंदे ने बगावत कर दी। वह कई दर्जन विधायकों के साथ पहले सूरत पहुंचे। सियासी पारा चढ़ने के बाद शिंदे अपने विधायकों के साथ असम पहुंचे। यहां वह एक फाइव स्टार होटल में 40 से अधिक विधायकों के साथ डेरा डाले हुए हैं। शिंदे के पास शिवसेना के 40 बागियों व दस अन्य का समर्थन होने का दावा किया जा रहा है। शिंदे ने 24 जून की रात में वडोदरा में अमित शाह व देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की है। बताया जा रहा है कि महाराष्ट्र में सरकार बनाने की संभावनाओं पर वह और बीजेपी के नेताओं ने बातचीत की है। हालांकि, चुपके से देर रात में हुई मुलाकात के बाद शिंदे, स्पेशल प्लेन से वापस गुवाहाटी पहुंच गए। 

उधर, शिंदे को पहले तो शिवसेना के नेताओं ने मनाने की कोशिश की लेकिन अब फ्लोर टेस्ट और कानूनी दांवपेंच चला जाने लगा है। दरअसल, शिंदे की बगावत के बाद उद्धव ठाकरे ने सारे बागियों को वापस आने और मिलकर फैसला करने का प्रस्ताव दिया। उद्धव ठाकरे की ओर से प्रवक्ता संजय राउत ने यह भी कहा कि अगर एनसीपी व कांग्रेस से बागी गुट चाहता है कि गठबंधन तोड़ा जाए तो विधायक आएं और उनके कहे अनुसार किया जाएगा। लेकिन सारे प्रस्तावों को दरकिनार कर जब बागी गुट बीजेपी के साथ सरकार बनाने का मंथन शुरू किया तो उद्धव गुट सख्त हो गया। इस पूरे प्रकरण में शिवसेना के प्रवक्ता संजय राउत मुखर होकर बागियों के खिलाफ मोर्चा लिए हुए हैं। 

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