रविवार को कृषि से जुड़े तीन अध्यादेशों को केंद्र सरकार ने राज्यसभा में भी ध्वनि मत से पास कर दिया है। आज के दिन को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में काला दिन बताते हुए कांग्रेस समेत 12 विपक्षी दलों ने राज्यसभा के नवनिर्वाचित उपसभापति हरिवंश के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश कर दिया है। कांग्रेस से राज्यसभा सांसद अहमद पटेल ने कहा कि उपसभापति हरिवंश को लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करना चाहिए थी लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। 

नई दिल्ली. संसद के मॉनसून सत्र में रविवार को कृषि से जुड़े तीन अध्यादेशों को केंद्र सरकार ने राज्यसभा में भी ध्वनि मत से पास कर दिया है। इसी बीच कांग्रेस समेत 12 विपक्षी दलों ने राज्यसभा के नवनिर्वाचित उपसभापति हरिवंश के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश कर दिया है। कांग्रेस से राज्यसभा सांसद अहमद पटेल ने कहा कि उपसभापति हरिवंश को लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करना चाहिए थी लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। उन्होंने आज के दिन को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में काला दिन बताया।

कृषि से जुड़े अध्यादेशों का जहां देशभर के किसान और विपक्षी दल विरोध कर रहे हैं वहीं अब इसके राज्यसभा से ध्वनि मत से पास होने के बाद राजनीतिक गर्मी बढ़ गई है। न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, विपक्षी सांसद अहमद पटेल ने कहा कि जिस तरीके से लोकतांत्रिक मूल्यों और प्रक्रिया को नकारते हुए ये अध्यादेश पास किए गए हैं उससे भारतीय लोकतंत्र की हत्या हुई है और आज का दिन इतिहास में 'काले दिन' के रूप में दर्ज हो गया है। बता दें कि ये अध्यादेश लोकसभा से पहले ही पास हो चुके हैं।

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क्या हैं कृषि अध्यादेशों में ?

पहला अध्यादेश राज्यों के कृषि उत्पाद मार्केट कानूनों (राज्य APMC Act) के अंतर्गत अधिसूचित बाजारों के बाहर किसानों की उपज के फ्री व्यापार की सुविधा देता है। सरकार का कहना है कि इस बदलाव के जरिए किसानों और व्यापारियों को किसानों की उपज की बिक्री और खरीद से संबंधित आजादी मिलेगी जिससे फसल के अच्छे दाम भी मिलने की संभावना बढ़ेगी। दूसरे अध्यादेश में कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग की बात है जिसमें सरकार का कहना है कि यह अध्यादेश किसानों को शोषण के भय के बिना समानता के आधार पर प्रोसेसर्स, एग्रीगेटर्स, थोक विक्रेताओं, बड़े खुदरा कारोबारियों, निर्यातकों आदि के साथ जुड़ने में सक्षम बनाएगा जिससे किसानों की आय में सुधार होगा।