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पिता दीवारों पर प्लास्टर कर रोज कमाते हैं 400 रु., अब बेटा पढ़ेगा दिल्ली के टॉप क्लास कॉलेज में...

'जय भीम मुख्यमंत्री प्रतिभा विकास योजना' का लक्ष्य आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को विभिन्न प्रतियोगी एवं प्रवेश परीक्षाओं के लिए नि:शुल्क कोचिंग की सुविधा उपलब्ध कराना है। 

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New Delhi, First Published Sep 21, 2019, 7:41 PM IST
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नई दिल्ली. दिल्ली आवास वित्त निगम के अध्यक्ष राजेश गोयल ने एक दिहाड़ी मजदूर के 17 साल के बेटे की इंजीनियरिंग की पढ़ाई का खर्च उठाने की पहल की है। छात्र ने दिल्ली सरकार की योजना के तहत नि:शुल्क कोचिंग पाकर नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एनआईटी) में दाखिला सुनिश्चित किया है।

अधिकारियों ने शनिवार को दी जानकारी 

अमरजीत और उनके माता पिता सोहन लाल तथा कविता धरमपुर के छोटे से क्वार्टर रहते हैं और प्रवेश परीक्षा के लिए वे निजी कोचिंग का खर्च उठाने में असमर्थ थे। अमरजीत ने दिल्ली सरकार की ओर से चलाई जा रही नि:शुल्क कोचिंग योजना 'जय भीम मुख्यमंत्री प्रतिभा विकास योजना' में दाखिला लिया। इस योजना की शुरुआत 2017 में की गयी थी। अमरजीत योजना के तहत कोचिंग पाने वाले पहले बैच में था और उसने सचदेवा न्यू पी टी कॉलेज से कोचिंग प्राप्त की। अधिकारियों के अनुसार अमरजीत की हर साल की पढ़ाई का खर्च एक लाख रुपये के करीब आयेगा। वह भारतीय प्रशासनिक सेवा में जाना चाहता है।

इससे पहले दिल्ली के समाज कल्याण मंत्री राजेंद्र पाल गौतम ने एक दिहाड़ी मजदूर की बेटी शाशि की पढ़ाई का खर्च उठाने की घोषणा की थी। शशि ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) पास करने के बाद लेडी हार्डिंग कॉलेज में दाखिला लिया था। शशि के पिता (47) अखिलेश कुमार गौर 12वीं तक पढ़े हैं और वह दीवारों पर प्लास्टर करने का काम कर हर दिन 400 रुपये कमाते हैं। शशि की मां कभी स्कूल नहीं गईं। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इससे पहले घोषणा की थी कि राष्ट्रीय राजधानी के एक निवासी ने नि:शुल्क कोचिंग योजना का लाभ लेकर आईआईटी दिल्ली में अपनी सीट सुरक्षित करने वाले विजय कुमार की पढ़ाई का खर्च वहन करने का फैसला किया है।

ये है योजना 

'जय भीम मुख्यमंत्री प्रतिभा विकास योजना' का लक्ष्य आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को विभिन्न प्रतियोगी एवं प्रवेश परीक्षाओं के लिए नि:शुल्क कोचिंग की सुविधा उपलब्ध कराना है। इससे पहले सिर्फ प्रतिभावान दलित छात्र ही नि:शुल्क कोचिंग की सुविधा प्राप्त कर सकते थे। लेकिन सरकार ने हाल में इसके दायरे में पिछड़े एवं सामान्य श्रेणी से आने वाले आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को भी शामिल किया है।

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