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किसान आंदोलन से हर दिन 3,500 करोड़ रु. का नुकसान हो रहा है, एसोचैम ने कहा- अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ेगा

कृषि कानूनों को लेकर सरकार और किसानों के बीच गतिरोध जारी है। किसानों की मांग है कि तीनों कृषि कानूनों को वापस लिया जाए। 20 दिन से दिल्ली के बॉर्डर पर किसान डटे हुए हैं। एसोसिएटेड चेम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (ASSOCHAM) और सीआईआई का अनुमान है कि किसानों के विरोध प्रदर्शन की वजह से रोजाना लगभग 3,500 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है। इंडस्ट्रीज बॉडीज ने सरकार और किसानों से जल्द गतिरोध को खत्म करने की अपील की है।

Assocham said that every day Rs 3500 crores from the farmer movement is losing kpn
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New Delhi, First Published Dec 15, 2020, 5:54 PM IST
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नई दिल्ली. कृषि कानूनों को लेकर सरकार और किसानों के बीच गतिरोध जारी है। किसानों की मांग है कि तीनों कृषि कानूनों को वापस लिया जाए। 20 दिन से दिल्ली के बॉर्डर पर किसान डटे हुए हैं। एसोसिएटेड चेम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (ASSOCHAM) और सीआईआई का अनुमान है कि किसानों के विरोध प्रदर्शन की वजह से रोजाना लगभग 3,500 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है। इंडस्ट्रीज बॉडीज ने सरकार और किसानों से जल्द गतिरोध को खत्म करने की अपील की है।

"रोजाना इस्तेमाल की वस्तुओं की कीमत बढ़ सकती है"
एसोचैम के मुताबिक, हाईवे ब्लॉक होने की वजह से सामान्य से 50 प्रतिशत ज्यादा समय लग रहा है। इससे सामानों की आवाजाही में दिक्कत की वजह से रसद लागत में 8-10 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है, जिससे दैनिक इस्तेमाल की वस्तुओं की कीमतें बढ़ सकती है।

"कई राज्यों की अर्थव्यवस्थाओं को बड़ा झटका"
एसोचैम ने सरकार और किसान संगठनों से नए कृषि कानूनों पर गतिरोध को हल करने का आग्रह किया, क्योंकि किसानों के विरोध के कारण रोजाना भारी नुकसान हो रहा है। रिपोर्ट में कहा गया कि विरोध की वजह से पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश राज्यों की अर्थव्यवस्थाओं को बड़ा झटका लग सकता है।

"ऑर्डर पूरे करने में दिक्कत का सामना करना पड़ रहा"
एसोचैम के अध्यक्ष डॉक्टर निरंजन हीरानंदानी ने कहा, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर की कुल अर्थव्यवस्था लगभग 18 लाख करोड़ रुपए है। किसानों के आंदोलन से सड़के जाम, टोल प्लाजा और रेलवे की नाकेबंदी की वजह से  आर्थिक गतिविधियां ठप हो गई हैं। टेक्सटाइल, ऑटो कंपोनेंट्स, साइकिल, स्पोर्ट्स गुड्स जैसे उद्योग जो एक्सपोर्ट पर निर्भर है उन्हें अपने ऑर्डर पूरे करने में दिक्कत का सामना करना पड़ेगा।

भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) ने कहा कि किसानों के आंदोलन की वजह से भारत के कई हिस्सों में सप्लाई और लॉजिस्टिक की दिक्कत की वजह से अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा।  

CII ने कहा कि किसानों के विरोध प्रदर्शन ने उत्तरी राज्यों जैसे दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में कई चेकप्वॉइंटर पर यातायात और सड़क को बाधित किया है। 

"लॉजिस्टिक्स लागत को 8-10 प्रतिशत तक बढ़ा सकता है"
सीआईआई के निखिल साहनी ने कहा, किसानों का आंदोलन लॉजिस्टिक्स लागत को 8-10 प्रतिशत तक बढ़ा सकता है। दिल्ली के आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में कई कंपनियां में काम करने वाले लोग नहीं है, क्योंकि लोग कंपनियों तक पहुंच ही नहीं पा रहे हैं। इससे छोटे उद्योग भी प्रभावित हो रहे हैं।

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