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आयोध्या विवाद: सुप्रीम कोर्ट को बंद लिफाफे में अंतिम रिपोर्ट सौंपेगा मध्यस्थता पैनल

अयोध्या जमीन विवाद को लेकर गठित किये गए मध्यस्थता पैनल को सुप्रीम कोर्ट को अंतिम लिफाफे में अपनी रिपोर्ट सौंपेगा। इससे पहले सर्वोच्च न्यायलय की पांच जजों की पैनल ने रिपोर्ट मांगी थी। पैनल की आखिरी बैठक दिल्ली में हुई।

Ayodhya dispute: Supreme Court to submit final report in closed envelope
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Uttar Pradesh, First Published Aug 1, 2019, 9:14 AM IST
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नई दिल्ली. अयोध्या जमीन विवाद को लेकर गठित किये गए मध्यस्थता पैनल को सुप्रीम कोर्ट को अंतिम लिफाफे में अपनी रिपोर्ट सौंपेगा। इससे पहले सर्वोच्च न्यायलय की पांच जजों की पैनल ने रिपोर्ट मांगी थी। पैनल की आखिरी बैठक दिल्ली में हुई। इससे पहले 18 जुलाई को स्टेटस रिपोर्ट पैनल ने कोर्ट को सौंपी थी, तब सीजेआई ने कहा था ये रिपोर्ट गोपनीय है, इस वजह से इसे नहीं लिया जा रहा। वहीं कोर्ट ने कहा था अगर रिपोर्ट में कोई सकारात्क हल नहीं निकला तो हम 2 अगस्त से रोज सुनवाई करने पर विचार करेंगे। 

पक्षकार ने क्या कहा था

कोर्ट में लगाई याचिका में पक्षकार विशारद ने कहा था- '' मध्यस्थता कमेटी के नाम पर विवाद सुलझने के आसार कम है। इसमें सिर्फ समय बर्बाद हो रहा है। कोर्ट मध्यस्थता कमेटी को खत्म कर खुद सुनवाई करे। पिछले 69 सालों से मामला अटका पड़ा है। मध्यस्थता का रुख सकारात्मक नजर नहीं आता। अबतक कोई निर्णय नहीं लिया जा सका है।''

जस्टिस कलीफुल्ला की अध्यक्षता में बनी है कमेटी

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच जज की बेंच ने रिटायर्ड जज जस्टिस कलीफुल्ला की अध्यक्षता में कमेटी बनाई थी। जिसमें बातचीत के जरिए आपसी सहमति से मसला सुलझाने की पहल की । शुरुआत में कमेटी को 2 महीने 8 हफ्ते दिए, फिर समय बढ़ाकर 13 हफ्ते यानी 15 अगस्त कर दिया था। फिर न्यायालय ने इसे 31 जुलाई कर दिया था। जिसके बाद 1 अगस्त पैनल अपनी रिपोर्ट सौंपेगा। 

इलाहबाद हाईकोर्ट ने दिया था ये फैसला
दरअसल, इलाहाबाद हाईकोर्ट हाईकोर्ट ने फैसला में कहा था- अयोध्या का 2.77 एकड़ का हिस्सा तीन टुकड़ों में समान बांट दिया जाए। जिसमें एक हिस्सा सुन्नी वक्फ बोर्ड, दूसरा- निर्मोही अखाड़ा और तीसरा- रामलला। साल 2010 में इस फैसले के खिलाफ 14 याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई थी। 
 

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