घर में ये जानवर-पंछी पालना अब मना है, देख लो पूरी लिस्ट!
वन्यजीव कानून के नियम अब और सख्त हो गए हैं। आपका मन करे या आप देखभाल कर रहे हों, तो भी वन्य जीवों को घर में पालना मना है। इस लिस्ट में हाल ही में कुछ और जानवर-पंछियों को शामिल किया गया है। नए शामिल किए गए जानवर-पंछियों की लिस्ट यहां दी गई है।

भारत में वन्य जीव कानून के नियम नए साल से और सख्त हो गए हैं। किसी भी कारण से अनाथ या अन्य रूप में वन्य प्राणियों की देखभाल करके पालना मना है। कुत्ता, बिल्ली समेत कुछ जानवर-पंछी पालतू जानवरों की लिस्ट में हैं। लेकिन बाकी वन्य जीवों को घर में पालना मना है।
हाल ही में कुछ जानवर-पंछियों को निषिद्ध सूची में शामिल किया गया है। इसके जरिए वन्य जीवों के नियम को और सख्त बनाया गया है। नई संशोधित सूची के अनुसार, घर में छोटी जाति के तोते को पालना मना है। वन्य पक्षी और विलुप्तप्राय प्रजाति होने के कारण इन तोतों को घर में पालना मना है।
पहले बंदरों की नकल करना या उन्हें पकड़कर पालतू बनाना, घर में पालने का शौक था। लेकिन अब बंदरों को पालना मना है। नियम तोड़ने पर कड़ी सजा हो सकती है। बंदरों की कई प्रजातियां हैं, और कई प्रजातियां विलुप्त होने के कगार पर हैं।
भारत में सांपों को घर में पालने की अनुमति नहीं है। अब इस सूची में लाल रेत बोआ सांप को भी शामिल किया गया है। यह एक विलुप्तप्राय सरीसृप है। भेड़िये और लोमड़ियों को पालना मना है। ये जंगली जानवर हैं, इन्हें पकड़ना भी अपराध है।
जंगली बिल्ली, उल्लू, गिद्धों को घर में पालना मना है। जंगली बिल्ली पालने पर भी प्रतिबंध है। अब विलुप्तप्राय भारतीय विशाल गिलहरी या मालाबार गिलहरी को भी पालना मना है। इसी तरह कछुआ, छिपकली समेत अन्य सरीसृप और जानवरों को घर में रखने की अनुमति नहीं है।
भारत के वन्यजीव संरक्षण निदेशक सुमंत बिन्दुमाधव ने इस बारे में बात की है। वन्य जीवों को नुकसान पहुंचाना अपराध है। कई प्रजातियां विलुप्त हो गई हैं। मौजूदा वन्य जीवों की संख्या भी कम हो रही है। उन्हें बचाने की जिम्मेदारी हमारी है। जंगल के किनारे हो रहे वन्य जीव और मानव संघर्ष को खत्म करने के लिए कार्यक्रम बनाने की जरूरत है।
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