याचिकाकर्ता ने याचिका में मांग की कि मोदी और शाह को आरपी अधिनियम की धारा 123 के तहत भ्रष्ट आचरण का दोषी घोषित किया जाए और 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान आदर्श आचार संहिता के कथित उल्लंघन के लिए अयोग्य घोषित किया जाए।

मुंबई। पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) और गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) को अयोग्य घोषित करने की मांग वाली याचिका को कोर्ट ने खारिज कर दिया है। बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) की नागपुर बेंच (Nagpur Bench) ने एक समीक्षा याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्णय लिया। याचिका में मांग की गई थी कि पीएम नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को जनप्रतिनिधित्व (RP) अधिनियम, 1951 के तहत अयोग्य घोषित किया जाए।

Add Asianetnews Hindi as a Preferred SourcegooglePreferred

भ्रष्ट आचरण का आरोप लगा दायर की थी याचिका

याचिकाकर्ता, अधिवक्ता राम खोबरागड़े (Ram Khobragade) ने इससे पहले इस संबंध में एक रिट याचिका दायर की थी, जिसे पिछले साल 6 अगस्त को उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया था। याचिका में मांग की गई है कि मोदी और शाह को आरपी अधिनियम की धारा 123 के तहत भ्रष्ट आचरण का दोषी घोषित किया जाए और 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान आदर्श आचार संहिता के कथित उल्लंघन के लिए अयोग्य घोषित किया जाए।

रिट खारिज होने के बाद समीक्षा याचिका दायर की

याचिकाकर्ता ने बाद में एक समीक्षा याचिका दायर की थी, जिसे 10 जून को उच्च न्यायालय ने भी खारिज कर दिया था और उस पर 500 रुपये का जुर्माना लगाया था। जुर्माना को उसे उच्च न्यायालय कानूनी सेवा उप-समिति, नागपुर के खाते में जमा करने का आदेश दिया गया था। न्यायमूर्ति सुनील शुक्रे और न्यायमूर्ति अनिल किलोर की खंडपीठ ने याचिका खारिज कर दी।

याचिकाकर्ता ने कही यह बात, अदालत ने बताया कानून

याचिकाकर्ता ने कहा कि उनके द्वारा दायर याचिका एक चुनावी याचिका नहीं थी, बल्कि एक ऐसी याचिका थी जिसमें पीएम मोदी और अन्य प्रतिवादियों को इस आधार पर अयोग्य घोषित करने का प्रयास किया गया था कि वे भ्रष्ट आचरण में शामिल थे।

अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता इस तरह के आरोप पर प्रतिवादियों को अयोग्य ठहराने की मांग कर रहा है, उसके लिए उचित उपाय वही होगा जो आरपी अधिनियम की धारा 80 के तहत प्रदान किया गया है। वास्तव में, भ्रष्ट आचरण में लिप्त होना एक पीड़ित व्यक्ति के लिए उस अधिनियम की धारा 100 के तहत चुनाव को अमान्य घोषित करने के लिए उपलब्ध आधारों में से एक है।

याचिकाकर्ता का कहना है कि अदालत के पास दोनों प्रतिवादियों को इस आधार पर अयोग्य घोषित करने की शक्ति है कि वे भ्रष्ट आचरण में लिप्त हैं और यह शक्ति आरपी अधिनियम की धारा 99 के तहत अदालत को प्रदान की गई है। अधिनियम की धारा 99 एक चुनाव याचिका पर विचार कर रहे उच्च न्यायालय की शक्ति से संबंधित है। कानून का यह प्रस्ताव उन आदेशों की प्रकृति से संबंधित है जो उच्च न्यायालय द्वारा चुनाव याचिका पर विचार करने के लिए पारित किए जा सकते हैं।