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चंद्रयान-2 का सफर अभी थमा नहीं, इन वजहों से इसरो ही नहीं 130 करोड़ भारतीयों की उम्मीद चांद पर...

चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम का संपर्क रात करीब 2 बजे यानी लैंडिंग से सिर्फ 69 सेकंड पहले इसरो से संपर्क टूट गया। लेकिन वैज्ञानिकों ने अभी उम्मीद नहीं छोड़ी, वे लगातार विक्रम से संपर्क साधने में जुटे हैं। 

Chandrayaan-2 orbiter flying around moon, 95% mission is successful
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Bengaluru, First Published Sep 7, 2019, 12:15 PM IST
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बेंगलुरु. चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम का संपर्क रात करीब 2 बजे यानी लैंडिंग से सिर्फ 69 सेकंड पहले इसरो से संपर्क टूट गया। लेकिन वैज्ञानिकों ने अभी उम्मीद नहीं छोड़ी, वे लगातार विक्रम से संपर्क साधने में जुटे हैं। 

चंद्रयान-2 मिशन के तहत लैंडर विक्रम की शुक्रवार-शनिवार रात 1 बजकर 53 मिनट पर चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडिंग होनी थी। पहले ये रात 1 बजकर 55 मिनट था। लेकिन तय वक्त बीत जाने के बाद भी विक्रम की स्थिति का पता नहीं चल सका। इसरो चेयरमैन डॉ के. सिवन ने बताया कि जब विक्रम चांद के दक्षिणी ध्रुव की सतह से 2.1 किमी दूर था, उसकी लैंडिंग प्रक्रिया एकदम ठीक थी। लेकिन उसी वक्त उसका धरती से संपर्क टूट गया।

11 साल की मेहनत बेकार नहीं ऑर्बिटर से उम्मीद बाकी
- चंद्रयान- 2 के तीन हिस्से हैं। ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर। लैंडर विक्रम को रोवर से प्राप्त जानकारी को ऑर्बिटर तक पहुंचाना था। फिर ऑर्बिटर उस जानकारी को धरती पर भेजेता। ऑर्बिटर 7.5 साल तक काम कर सकता है। 

- इसी ऑर्बिटर से लैंडर अलग हुआ था। ऑर्बिटर अभी अभी भी चंद्रमा से 119 किमी से 127 किमी की ऊंचाई पर मौजूद है। यानी लैंडर और रोवर की स्थिति के बारे में जानकारी न होने के बावजूद ऑर्बिटर अपना काम करेगा और मिशन जारी रहेगा....

'95% मिशन अभी बाकी'
इसरो के वैज्ञानिक ने रविवार को बताया कि भले ही लैंडर विक्रम से संपर्क टूट गया हो, लेकिन 978 का यह मिशन फेल नहीं हुआ है। विक्रम और रोवर से संपर्क टूटने से सिर्फ मिशन को 5% नुकसान पहुंचा है। लेकिन 95% मिशन अभी बाकी है। क्यों कि ऑर्बिटर अभी भी चंद्रमा की सतह के ऊपर घूम रहा है।

ऑर्बिटर क्या काम करेगा? 
- चांद की सतह का नक्शा तैयार कर उसके अस्तित्व और विकास का पता लगाने की कोशिश की जाएगी।
- चांद पर विभिन्न खनिज पदार्थों जैसे एल्युमीनियम, सिलिकॉन, मैग्नीशियम, कैल्शियम, टाइटेनियम, आयरन और सोडियम का पता लगाना। 
- यहां सतह पर सोलर रेडिएशन की तीव्रता मापना, हाई रेजोल्यूशन तस्वीरें खींचना। इस दौरान ऑर्बिटर विक्रम की स्थिति के बारे में भी जानकारी दे सकता है।
- दक्षिणी ध्रुव पर पानी की मौजूदगी और गड्ढों में बर्फ के रूप में जमा पानी का पता लगाना।

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