चेन्नई के 19 साल के महमूद अकरम 46 भाषाएं बोलते हैं और 400 भाषाओं से परिचित हैं। कम उम्र में ही उन्होंने भाषा सीखने की शुरुआत की और अब दुनिया भर में छात्रों को प्रेरित कर रहे हैं।

Mahmood Akram: भाषा संबंधी अपने अनोखे ज्ञान के चलते चेन्नई में रहने वाले 19 साल के महमूद अकरम ने दुनिया को चौंका दिया है। बहुत से लोग दो से तीन भाषा बोलने में भी संघर्ष करते हैं। वहीं, अकरम फर्राटे से 46 भाषा बोल सकते हैं। यही नहीं, वह 400 भाषा अच्छी तरह जानते भी हैं।

Add Asianetnews Hindi as a Preferred SourcegooglePreferred

अकरम भाषा सीखने की दुनिया में संभावनाओं को नया आकार दे रहे हैं। भाषा सीखने की उनकी यात्रा कम उम्र में ही शुरू हो गई थी। उनके पिता शिल्बी मोझिप्रियन भाषा के अच्छे जानकार हैं। उन्होंने कई विश्व रिकॉर्ड स्थापित किए हैं। अब महमूद अकरम अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने छोटी उम्र में भाषाएं सिखाने से लेकर म्यांमार और कंबोडिया जैसे देशों में कार्यशालाएं आयोजित करने तक कई बड़े काम किए हैं। वह अपने जुनून से दुनिया भर के छात्रों को प्रेरित कर रहे हैं। इसके साथ ही अपनी पढ़ाई भी जारी रखे हुए हैं।

अकरम के पिता शिल्बी मोझिप्रियन को आती हैं 16 भाषाएं

अकरम की इस सफलता का सबसे बड़ा श्रेय उनके पिता शिल्बी मोझिप्रियन को जाता है। शिल्बी खुद 16 भाषाएं जानते हैं। उन्होंने छोटी उम्र से ही अकरम को अलग-अलग भाषाएं सिखाना शुरू कर दिया था। अकरम की प्रतिभा तब सामने आई जब उन्होंने छह दिनों में अंग्रेजी वर्णमाला और तीन सप्ताह में तमिल लिपि सीख ली। इतना सीखने में आम बच्चों को महीनों लगते हैं।

अकरम ने 12 साल की उम्र में 400 भाषाओं के ज्ञान का विश्व रिकार्ड बना लिया था। इससे दुनिया के शीर्ष भाषाविद् भी प्रभावित हुए थे। अकरम इस समय अंग्रेजी साहित्य और एनीमेशन की पढ़ाई कर रहे हैं। उन्होंने म्यांमार और कंबोडिया जैसे देशों में भाषा कार्यशालाएं चलाई हैं। वह वैश्विक स्तर पर अपनी विशेषज्ञता शेयर कर रहे हैं।