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धीरे-धीरे कमजोरी बढ़ रही थी, खड़ा होना, चलना-फिरना मुश्किल होता जा रहा था, एक बार तो उम्मीद टूटने लगी थी

Asianetnews Hindi के लिए अमिताभ बुधौलिया ने भोपाल में रहने वालीं कामिनी श्रीवास्तव से बात की। कोरोना से जीतने वालों की कहानियों की इस कड़ी में पढ़िए कि कैसे कामिनी और उनके परिवार ने मौत का डर निकाल कर हौसलों से कोरोना को मात दी। कब उनको पता चला कि वे और उनकी फैमिली पॉजिटिव हैं। मन में कैसे-कैसे बुरे ख्याल आए और फिर कैसे जीती कोरोना से जंग...

Corona Positive Story, how Kamini Srivastava from bhopal and her family defeated Covid kpa
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Bhopal, First Published May 24, 2021, 6:05 AM IST
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कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर ने देश पर बुरा असर डाला है। इस बार संक्रमण तेजी से फैला और मौतों की संख्या भी बढ़ती गई। शहर हो या गांव...हर जगह संक्रमण ने अपने पैर पसारे। कई लोगों ने बहुत सावधानी बरती, बावजूद महामारी से खुद को बचा नहीं पाए। कोरोना के इस संकट में बहुतों ने हौसला खोया, लेकिन कई ऐसे भी हैं, जिन्होंने बीमारी के आगे अपने घुटने नहीं टेके और हंसती-खेलती जिंदगी में वापस लौट आए। ऐसी ही एक गृहिणी हैं कामिनी श्रीवास्तव। अकेली वे ही नहीं, बल्कि उनके पति और बेटी भी संक्रमित हो गए थे। शुरुआत में डर लगा, लेकिन फिर हिम्मत से संकट का सामना किया।

Asianetnews Hindi के अमिताभ बुधौलिया ने भोपाल में रहने वालीं कामिनी श्रीवास्तव से बात की। कोरोना से जीतने वालों की कहानियों की इस कड़ी में पढ़िए कि कैसे कामिनी और उनके परिवार ने मौत का डर निकाल कर हौसलों से कोरोना को मात दी। 

सावधानी बरतने के बावजूद हम तीनों संक्रमित हो गए...यह कभी समझ ही नहीं पाए

यह अप्रैल के पहले हफ्ते की बात है। मैं, मेरे पति मनोज कुमार श्रीवास्तव और बिटिया हर्षिता तीनों कोरोना संक्रमित हो गए थे। हम लोग पिछले साल के कोरोना काल से ही बहुत सावधानी बरत रहे थे, फिर भी कैसे संक्रमित हो गए, यह कभी समझ नहीं पाए। मेरे पति आफिस के काम से शहर से बाहर गए थे। हालांकि वो होली के एक दिन पहले ही भोपाल लौट आए थे। उन्हें घर पहुंचते ही शरीर में थोड़ा-थोड़ दर्द शुरू हुआ। भूख भी नहीं लग रही थी। पूरा दिन बीत जाता था, लेकिन बमुश्किल एक रोटी खाते थे। हालांकि हमने उनको काढ़ा और भाप देना शुरू कर दिया था। गर्म पानी से गरारे भी करवाते। लेकिन परेशानी जस कि तस बनी रही। होली के एक-दो दिन बाद मुझे और बेटी को भी हल्का बुखार आने लगा। खांसी होने लगी। हम लोगों ने पैरासिटामोल, कप सिरप और मल्टीविटामिन की गोलियां लेनी शुरू कर दीं। हम मां-बेटी भी काढ़ा और भाप लेने लगे। लेकिन इतना करने के बाद भी तबीयत में सुधार नहीं हो रहा था। तो सबसे पहले हमने 3 अप्रैल को पति को कोरोना टेस्ट कराने अस्पताल भेजा। शाम को उनकी रिपोर्ट आई, वे पॉजिटिव थे। हमने एक अलग कमरे में उन्हें आइसोलेट किया। अगले दिन हम मां-बेटी भी टेस्ट कराने गए। 4 अप्रैल को हमारी भी रिपोर्ट पॉजिटिव आई।

दिसंबर, 2020 में जेठ के कोरोना से निधन के कारण हम लोग घबरा गए थे
तीनों की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद हम लोग घबरा गए थे। क्योंकि दिसंबर, 2020 में मेरे जेठ का कोरोना से निधन हो गया था। इसलिए हमारे मन में पहले से ही कोरोना को लेकर दहशत थी। रिपोर्ट देखकर पहले तो हमें कुछ समझ ही नहीं आया कि क्या करें, कैसे अपने आप को संभालें? रिपोर्ट लेकर अस्पताल से जब हम घर आ रहे थे, तब मन विचलित था। फिर हमने थोड़ी हिम्मत जुटाई। सबसे पहले हमने कामवाली बाई को आने से मना किया। क्योंकि हमें उसकी और बाकी परिवारों की भी फिक्र थी। वो हमारे यहां से दूसरों के घर काम पर जाती, तो संक्रमण फैलता।  हॉस्पिटल से रिपोट लेकर घर आने के बाद कोरोना से असली लड़ाई शुरू हो गइ थी। डॉक्टर से परामर्श लेने के बाद मन में एक संतुष्टि तो थी कि हम होम आइसोलेशन में रहकर ही ठीक हो जाएंगे। लेकिन हमें बहुत सावधानी से रहना था।

मालूम था कि अगले 14 दिन बहुत मुश्किलभरे होने वाले हैं, लेकिन डॉक्टर की सलाह काम आई

ये बात हमें अच्छे से मालूम  थी कि हम लोगों के अगले 14 दिन बहुत मुश्किल होने वाले हैं, लेकिन हम इतनी आसानी से कहां हार मानने वाले थे! हम तीनों ने संकल्प लिया की इस संकट से उबरना है और कोरोना को हराकर जीतेंगे! हम लोगों के लिए डॉक्टर की सलाह काफी कारगर रही। डॉक्टर ने कहा था कि हमें दिनभर में 3-4 बार ऑक्सीजन लेवल मॉनिटर करना होगा। समय पर दवा लेनी होगी। प्रोटीन से भरपूर खाना लेना, नियमित भाप लेना और गरारे करना। ब्रीदिंग एक्सरसाइज(श्वांस से संबंधित व्यायाम) करने को भी डॉक्टर ने बोला था। हमें आराम करना है और नींद पर्याप्त लेनी है। डॉक्टर ने एक यह भी स्पष्ट किया था कि जैसे ही ऑक्सीजन का स्तर 94 के नीचे आए, तो हम तुरंत अस्पताल पहुंचें।

...और फिर हमने अपनी दिनचर्या को ऐसे ढाल लिया
डॉक्टर की कही हर बात को ध्यान में रखते हुए हमने एक दिनचर्या बनाई। हम रोज सुबह उठकर आधा घंटे सूर्य की रोशनी में बैठते और ब्रीदिंग एक्सरसाइज करते। दिन भर में तीन बार गर्म पानी से गरारे करते और भाप लेते। सुबह-शाम काढ़ा पीते। अपनी-अपनी दवाइयां भी समय अनुसार लेते रहे और ऑक्सीजन लेवल दिनभर में 4 बार चेक करते रहे। 14 दिनों तक हमने अपने खान-पान पर विशेष ध्यान दिया। सबसे पहले हमने डाइट में फल, नारियल पानी, ताजा पनीर, सूखे मेवे, अंडे, स्प्राउट्स और ओट्स आदि को शामिल किया।

परेशानियों के बीच कुछ लोग देवदूत बनकर आए
शुरुआती दिनों में धीरे-धीरे कमजोरी बढ़ती जा रही थीं। खड़ा होना, चलना-फिरना मुश्किल हो रहा था। स्वाद और गंध जाने से घबराहट होने लगी थी। असली परशानी तब शुरू हुई, जब खाना बनाने की ताकत भी नहीं बची। बाई ने आना बंद कर दिया था। अचानक हमारे दिमाग में एक आइडिया आया कि क्यों न टिफिन शुरू कर दें? लेकिन हमारे घर कोई भी टिफिन पहुंचाने को तैयार नहीं हुआ। इस मुश्किल में एक टिफिन वाला देवदूत बनकर आया। ईश्वर की कृपा से उसने दोनों समय का पौष्टिक और स्वच्छ खाना पहुंचान शुरू कर दिया। मैं उसका यह उपकार कभी नहीं भूलूंगी। अच्छा खाना मिलने से हमारी रिकवरी तेजी से हुई। धीरे-धीरे ऊर्जा आना शुरू हुई और हम घर का थोड़ा-थोड़ा काम करने लगे। हमारे कुछ पड़ोसियों और मित्रों ने समय पर दवाएं, फल, और बाकी जरूरी सामान हमें पहुंचाया। वे नियमित फोन पर हम लोगों का हालचाल पूछते रहते। इससे हमारी हिम्मत बढ़ती गई। सबके सहयोग से कभी ऐसा नहीं लगा कि हम लोग अपनों से दूर हैं।

संक्रमण के बाद ये बातें समझ आईं
कोरोना से संक्रमित होने पर हमको ये बातें समझ आईं कि परिवार के साथ समय बिताना कितना जरूरी होता है। आजकल की भाग-दौड़ में हम अपने परिवार के साथ सुखों के दो पल भी नहीं बिताते हैं। जब हमारी हालत में थोड़ा सुधार हुआ, तो हम रोज शाम को बैठकर पुरानी यादें ताजा करते थे। इस्से हमारे घर का वातावरण खुशनुमा हो जाता था। हम यह भूल जाते थे कि कोरोना पॉजिटिव हैं। यह भी एक प्रमुख कारण था कि हमारी रिकवरी जल्दी हुई।

इस महमारी से गुजरने के बाद हमको ये भी एहसास हुआ कि अगर हमारे आस-पास कोई कोई कोरोना संक्रामित हो, तो उनका ध्यान रखें, और उनकी यथा संभव मदद भी करें। फोन पर उनका हालचाल पूछते रहें। महमारी में हमने यह जाना कि मानसिक सहारा कितना जरूरी है। यही हमें मुश्किल समय से उबरने में मदद करता है। ईश्वर से हमारी यही प्रार्थना है की सभी स्वास्थ्य रहे, किसी के अपने न बिछुड़ें, किसी का परिवार न बिखरे और इस महामारी का नाश हो।
 

Asianet News का विनम्र अनुरोधः आइए साथ मिलकर कोरोना को हराएं, जिंदगी को जिताएं...। जब भी घर से बाहर निकलें माॅस्क जरूर पहनें, हाथों को सैनिटाइज करते रहें, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें। वैक्सीन लगवाएं। हमसब मिलकर कोरोना के खिलाफ जंग जीतेंगे और कोविड चेन को तोड़ेंगे। #ANCares #IndiaFightsCorona

  

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