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Deep Dive with Abhinav Khare: हिंदुओं के प्रति नफरत फैलाने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे बुद्धिजीवी

भारत के बुद्धिजीवीवर्ग ने इसे काफी हद तक स्पष्ट कर दिया है कि हिंदुत्व के खिलाफ लड़ाई में वे जिहादी कट्टरपंथियों का समर्थन करते रहेंगे। उन्होंने इस्लामी चरमपंथियों को अपना साथी मान लिया है। हाल ही में ऐसा फैज अहमद फैज की हालिया कविताओं में पाया। ऐसा सिर्फ इसलिए कि वे एक कवि हैं और लगता है कि वे इस्लामी अतिवाद को उचित नहीं मानते, जिसका प्रचार उनके शब्द करते हैं।

Deep Dive with Abhinav Khare: Indian intelligentsia stirring the pot of hatred towards Hindus KPP
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New Delhi, First Published Jan 6, 2020, 7:54 PM IST
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नई दिल्ली. भारत के बुद्धिजीवीवर्ग ने इसे काफी हद तक स्पष्ट कर दिया है कि हिंदुत्व के खिलाफ लड़ाई में वे जिहादी कट्टरपंथियों का समर्थन करते रहेंगे। उन्होंने इस्लामी चरमपंथियों को अपना साथी मान लिया है। हाल ही में ऐसा फैज अहमद फैज की हालिया कविताओं में पाया। ऐसा सिर्फ इसलिए कि वे एक कवि हैं और लगता है कि वे इस्लामी अतिवाद को उचित नहीं मानते, जिसका प्रचार उनके शब्द करते हैं।

भारत एक ऐसा देश है जहाँ लगभग 80% जनसंख्या हिंदू है। लेकिन फैज अहमज फैज अपनी कविताओं में अल्लाह के नाम पर मूर्ति तोड़ने की बात करते हैं। इसे ऐसे लोग, जो मूर्तियों की पूजा करते हैं (जो भारत में बहुसंख्यक हैं) वो इसे कैसा मानते हैं?

Deep Dive with Abhinav Khare

फैज अहमद पाकिस्तानी कवि हैं। पाकिस्तान जैसे देश में मूर्तियों को तोड़ना सामान्य हो सकता है, जबकि भारत में इसे बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। मूर्तिपूजन हिंदू धर्म का एक अभिन्न अंग है और ऐसी कविताएं हिंदू विश्वास का अपमान करने के अलावा और कुछ नहीं हैं। फैज की मूल कविता पाकिस्तान के उस तानाशाह के खिलाफ थी, जो इस्लाम के नियमों का पालन करने में विफल रहे। इसलिए यह भारत में कैसे उपयुक्त मानी जा सकती है। भारत को पाकिस्तान की तरह इस्लामी क्यों होना चाहिए? क्यों सिर्फ अल्लाह का नाम रहे?

CAA के विरोध में हिंदुओं के खिलाफ लग रहे नारे
नागरिकता कानून के विरोध के दौरान हमने बार बार हिंदुओं से आजादी और काफिरों से आजादी जैसे नारे सुने। हमने ऐसे लोगों को देखा है जो जिहाद का समर्थन और प्रचार करते हैं, इन विरोध प्रदर्शनों का चेहरा बनते हैं। हमने बॉलीवुड और लिबरल्स को भी इन विरोध प्रदर्शनों का समर्थन करते देखा है। 

ऐसे में इस कविता को नागरिकता कानून के विरोध का गाना बनाना इस विचारधारा का स्वाभाविक विस्तार ही लगता है। मजेदार बात यह है लेकिन हिंदू खुले हाथों से इस तरह के विद्रोह को स्वीकार करना चाहिए।

Abhinav Khare

भारत में मुसलमानों जब भी विरोध करते हैं, उदारवादी उनका समर्थन करने के लिए सामने आ जाते हैं। उदारवादी सभी जिहादियों की पीआर मशीनरी की तरह व्यवहार करते हैं। हम अपने देश में उदारवादियों की तरह बुद्धिमान नहीं हो सकते हैं, लेकिन हिंदू धर्म के प्रति उनकी घृणा और जिहाद के लिए बिना शर्त उनके प्रेम के प्रति हम निश्चित ही अंधे नहीं हैं।

कौन हैं अभिनव खरे

अभिनव खरे एशियानेट न्यूज नेटवर्क के सीईओ हैं, वह डेली शो 'डीप डाइव विद अभिनव खरे' के होस्ट भी हैं। इस शो में वह अपने दर्शकों से सीधे रूबरू होते हैं। वह किताबें पढ़ने के शौकीन हैं। उनके पास किताबों और गैजेट्स का एक बड़ा कलेक्शन है। बहुत कम उम्र में दुनिया भर के 100 से भी ज्यादा शहरों की यात्रा कर चुके अभिनव टेक्नोलॉजी की गहरी समझ रखते है। वह टेक इंटरप्रेन्योर हैं लेकिन प्राचीन भारत की नीतियों, टेक्नोलॉजी, अर्थव्यवस्था और फिलॉसफी जैसे विषयों में चर्चा और शोध को लेकर उत्साहित रहते हैं। उन्हें प्राचीन भारत और उसकी नीतियों पर चर्चा करना पसंद है इसलिए वह एशियानेट पर भगवद् गीता के उपदेशों को लेकर एक सफल डेली शो कर चुके हैं।

मलयालम, अंग्रेजी, कन्नड़, तेलुगू, तमिल, बांग्ला और हिंदी भाषा में प्रासारित एशियानेट न्यूज नेटवर्क के सीईओ अभिनव ने अपनी पढ़ाई विदेश में की हैं। उन्होंने स्विटजरलैंड के शहर ज्यूरिख सिटी की यूनिवर्सिटी ETH से मास्टर ऑफ साइंस में इंजीनियरिंग की है। इसके अलावा लंदन बिजनेस स्कूल से फाइनेंस में एमबीए (MBA) भी किया है।  

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