दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने महिलाओं के एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है जो गरीबों से बच्चा खरीदकर अमीरों को बेचता था। गिरोह के सदस्यों की नजर ऐसे गरीब परिवारों पर रहती थी, जिनके पहले से बच्चे हों और नया बच्चा दुनिया में आने वाला हो। 

नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस (Delhi Police) की क्राइम ब्रांच ने महिलाओं के एक ऐसी गिरोह का पर्दाफाश किया है जो गरीबों से बच्चा खरीदकर अमीरों को बेचता था। गिरोह की सदस्यों की नजर ऐसे गरीब परिवारों पर रहती थी, जिनके पहले से बच्चे हों और नया बच्चा दुनिया में आने वाला हो। ये पैसे का लालच देकर गरीब परिवार से बच्चा खरीद लेती थी और उसे ऐसे अमीर परिवार को बेच देती थी, जिनके पास बच्चा नहीं हो।

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शुरुआती जांच में पता चला है कि यह गिरोह 50 से अधिक बच्चे बेच चुका है। पकड़ी गई महिलाओं की पहचान गगन विहार (साहिबाबाद) निवासी प्रिया जैन (26), मंगोलपुरी दिल्ली निवासी प्रिया, वेस्ट पटेल नगर निवासी काजल, शाहदरा निवासी रेखा उर्फ अंजलि, विश्वास नगर निवासी शिवानी (38) गांव डूंडाहेड़ा, गुरुग्राम निवासी प्रेमवती के रूप में हुई है। 17 दिसंबर को अपराध शाखा की टीम को सूचना मिली थी कि नवजात बच्चों की तस्करी करने वाला एक गैंग गांधी नगर पुश्ता रोड, श्मशान घाट के पास आने वाला है। इसके बाद टीम ने करीब 3.30 बजे वहां से प्रिया जैन, प्रिया और काजल को पकड़ लिया। इनके पास से सात-आठ दिन का नवजात शिशु बरामद हुआ। इनसे हुई पूछताछ के बाद गिरोह का पर्दाफाश हुआ।

10 बच्चों की हुई पहचान
क्राइम ब्रांच (Delhi Police Crime Branch) के डीसीपी राजेश राव ने बच्चों की तस्करी से जुड़े गिरोह के बारे में जानकारी दी। राजेश राव ने कहा कि दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को बच्चों की खरीद-फरोख्त में जुटे गिरोह के बारे में गुप्त सूचना मिली थी। इसके बाद एक टीम को मामले की जांच में लगाया गया था। गिरोह की छह सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। ये लोग नवजात बच्चों की खरीद-बिक्री में शामिल थे। इनके द्वारा बेचे गए 10 बच्चों की पहचान की गई है। गिरोह के सदस्यों के पास से दो बच्चों को बरामद किया गया है। 

3-4 लाख रुपए में करते थे एक बच्चे का सौदा
राजेश राव ने कहा कि गैंग के लोग गरीब परिवार से बच्चा खरीदते थे और अमीर को बेचते थे। ये लोग 1-2 लाख रुपए में बच्चा खरीदते थे और उसे 3-4 लाख रुपए में बेच देते थे। बच्चे की हर डील पर गिरोह के लोग 2-3 लाख रुपए कमाते थे। गिरोह के लोग अपनी काली करतूत को बेहद शातिराना तरीके से अंजाम देते थे। वे खरीदने वाले और बेचेन वाले दोनों को इस बात का भरोसा दिलाते थे कि जो कर रहे हैं वह कानूनी रूप से जायज है।

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