डीएमके ने कहा कि समान नागरिक संहिता सबसे पहले हिंदू धर्म में लागू की जानी चाहिए। अनुसूचित जाति और जनजाति सहित प्रत्येक व्यक्ति को देश के किसी भी मंदिर में पूजा करने की अनुमति दी जानी चाहिए।

Uniform Civil Code: पीएम नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को भोपाल में पसमांदा मुसलमानों और यूनिफार्म सिविल कोड का मुद्दा उछाला। इस पर डीएमके और कांग्रेस ने पलटवार किया है। डीएमके ने कहा कि पहले हिंदुओं के लिए एक समान संहिता लागू की जानी चाहिए जिससे सभी जातियों के लोगों को मंदिरों में पूजा करने की अनुमति हो। उधर, कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री को पहले देश में गरीबी, महंगाई और बेरोजगारी के बारे में जवाब देना चाहिए।

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पहले पूजा की अनुमति दें...फिर यूनिफार्म सिविल कोड

डीएमके नेता टीकेएस एलंगोवन ने कहा कि समान नागरिक संहिता सबसे पहले हिंदू धर्म में लागू की जानी चाहिए। अनुसूचित जाति और जनजाति सहित प्रत्येक व्यक्ति को देश के किसी भी मंदिर में पूजा करने की अनुमति दी जानी चाहिए। हम यूसीसी (समान नागरिक संहिता) केवल इसलिए नहीं चाहते क्योंकि संविधान ने हर धर्म की सुरक्षा का प्रावधान किया है।

कांग्रेस बोली-महंगाई-बेरोजगारी और गरीबी के बारे में जवाब देना चाहिए

कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल कहा कि पीएम मोदी को पहले देश में गरीबी, महंगाई और बेरोजगारी के बारे में जवाब देना चाहिए। वह मणिपुर मुद्दे पर कभी नहीं बोलते। पूरा राज्य जल रहा है। वह सिर्फ इन सभी मुद्दों से लोगों का ध्यान भटका रहे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी के किस बयान पर विपक्ष दे रहा बयान

पीएम नरेंद्र मोदी ने भोपाल में कहा कि यूनिफार्म सिविल कोड से एक परिवार के विभिन्न सदस्यों के लिए अलग-अलग नियम नहीं। एक देश में दो कानून नहीं होते। इसलिए समान नागरिक संहिता को लागू करना बेहद जरूरी है। तीन तलाक को लेकर भी मोदी ने सवाल किया। उन्होंने कहा कि यदि तीन तलाक इस्लाम का अभिन्न अंग होता तो पाकिस्तान, बांग्लादेश, मिस्र, इंडोनेशिया, कतर, जॉर्डन और सीरिया जैसे मुस्लिम-बहुल देशों में इसको खत्म क्यों किया गया। मिस्र में 90 फीसदी सुन्ना मुसलमान हैं लेकिन उसने 80-90 साल पहले तीन तलाक को खत्म कर दिया था।