राज्य में हिंसा की घटनाओं पर आयोग ने मुख्य सचिव और पुलिस प्रमुख को फटकार लगाई थी। आयोग के आदेश पर राज्य में 4 जून के बाद भी सेंट्रल फोर्स तैनात रहेगा।

Post Election Violence in Andhra Pradesh: आंध्र प्रदेश में विधानसभा चुनाव, देश भर में चौथे चरण के हुए लोकसभा चुनाव के साथ ही संपन्न करा दिया गया। हालांकि, राज्य में चुनाव बाद हिंसा की कई घटनाएं सामने आई है। चुनाव बाद हुई हिंसा को देखते हुए चुनाव आयोग ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को राज्य में केंद्रीय बलों की 25 कंपनियां तैनात किए जाने को कहा है। राज्य में हिंसा की घटनाओं पर आयोग ने मुख्य सचिव और पुलिस प्रमुख को फटकार लगाई थी। आयोग के आदेश पर राज्य में 4 जून के बाद भी सेंट्रल फोर्स तैनात रहेगा।

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भारत चुनाव आयोग ने कहा कि आंध्र प्रदेश के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया गया है कि ऐसी हिंसा दोबारा न हो। आयोग ने कहा कि राज्य के पुलिस व प्रशासनिक प्रमुखों को ऐसी स्थिति से बचने के लिए पहले से उपाय करने चाहिए थे लेकिन भविष्य में ऐसा न हो इसके लिए सब सतर्क रहें।

गुरुवार को राज्य के दोनों अधिकारी हुए थे तलब

ईसीआई ने सोमवार और मंगलवार को हुई हिंसा की घटनाओं पर व्यक्तिगत स्पष्टीकरण मांगने के लिए मुख्य सचिव केएस जवाहर रेड्डी और डीजीपी हरीश गुप्ता को निर्वाचन सदन में बुलाया था।

परिणाम घोषित होने के बाद नहीं होनी चाहिए हिंसा

चुनाव आयोग ने कहा कि परिणाम घोषित होने के बाद किसी भी हिंसा को नियंत्रित करने के लिए गृह मंत्रालय को मतगणना के बाद 15 दिनों के लिए आंध्र प्रदेश में 25 सीएपीएफ (केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल) कंपनियों को बनाए रखने का निर्देश देने का फैसला किया है। राज्य सरकार ने अनुरोध किया था कि मतगणना के बाद 15 दिनों तक केंद्रीय बलों को बरकरार रखा जाए।

आंध्र प्रदेश में हिंसा को लेकर प्रमुख दल एक दूसरे पर लगा रहे आरोप

आंध्र प्रदेश में हुए चुनाव के बाद सोमवार और मंगलवार को हिंसा की कई घटनाएं हुई। राज्य के कुछ हिस्सों में चुनाव बाद हिंसा के बाद चुनाव आयोग ने सख्ती की है। उधर, चुनाव बाद हिंसा को लेकर सत्तारूढ़ वाईएसआरसीपी और विपक्षी टीडीपी आमने-सामने हैं। वाईएसआर कांग्रेस जहां पूर्व सीएम चंद्रबाबू नायडू की पार्टी पर हिंसा करने का आरोप लगा रही है तो वहीं टीडीपी के लोग, वाईएस जगन मोहन रेड्डी की सत्तारूढ़ पार्टी पर आरोप मढ़ रहे हैं।

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