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मुसलमानों में 'जहर' भरने वाले PFI को क्यों करना पड़ा बैन, 15 पॉइंट में समझिए इसके देशद्रोही होने की कहानी

हिंदू-मुस्लिम के बीच 'नफरत की दीवार' खड़ी करके अगले 25 सालों में भारत को 'इस्लामिक देश' बनाने की साजिश रचता आ रहे चरमपंथी मुस्लिम संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया(PFI) पर केंद्र सरकार ने 5 साल बैन लगा दिया है। आइए 15 पॉइंट में जानते हैं, इस कुख्यात संगठन की पूरी कहानी...
 

explainer Why the Islamic extremist organization Popular Front of India had to be banned kpa
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First Published Sep 28, 2022, 8:03 AM IST

नई दिल्ली. CAA और NRC के विरोध को लेकर देश में अराजकता फैलाना हो या दिल्ली में दंगा अथवा हिजाब को लेकर मुस्लिम छात्राओं को भड़काने की साजिश; पीएफआई का कनेक्शन हर जगह सामने आता रहा है। हिंदू-मुस्लिम के बीच 'नफरत की दीवार' खड़ी करके अगले 25 सालों में भारत को 'इस्लामिक देश' बनाने की साजिश रचते आ रहे चरमपंथी मुस्लिम संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया(PFI) पर केंद्र सरकार ने 5 साल बैन लगा दिया है। आइए 15 पॉइंट में जानते हैं, इस कुख्यात संगठन की पूरी कहानी...

1. टेरर फंडिंग और देशविरोधी गतिविधियों(Terror funding and anti-national activities) में लिप्त चरमपंथी मुस्लिम संगठन पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया(PFI) पर सरकार ने बैन लगा दिया है। गृहमंत्रालय ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं। एक दिन पहले ही यानी 27 सितंबर को NIA समेत दूसरी एजेंसियों ने दूसरी बार PFI के 8 राज्यों में 25 से अधिक ठिकानों पर छापा मारा था।  

2. गृह मंत्रालय ने PFI को गैर कानूनी घोषित करते हुए अगले 5 साल के लिए बैन कर दिया है। इसके साथी इससे जुड़े सारे दूसरे संगठनों पर भी बैन रहेगा। NIA और ED की छापेमारी में इसके खिलाफ टेरर लिंक से संबंधित कई अहम दस्तावेज मिले हैं।

3. PFI के अलावा उससे जुड़े 8 और संगठनों पर बैन लगाया है। गृह मंत्रालय ने इन संगठनों को बैन करने का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। PFI के अलावा रिहैब इंडिया फाउंडेशन (RIF), कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (CFI),ऑल इंडिया इमाम काउंसिल (AIIC), नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइजेशन (NCHRO), नेशनल वुमंस फ्रंट, जूनियर फ्रंट, एम्पावर इंडिया फाउंडेशन, रिहैब फाउंडेशन जैसे सहयोगी संगठनों पर भी बैन रहेगा।

4. जांच एजेंसियों ने ऑपरेशन ऑक्टोपस के तहत PFI के ठिकानों पर दो बड़े छापे(पहला-22 सितंबर और दूसरा 27 सितंबर) मारे थे। इस दौरान संगठन से जुड़े तमाम बड़े पदाधिकारियों सहित हर राज्य से अहम कार्यकर्ता अरेस्ट किए गए हैं। PFI के खिलाफ एक्शन की तैयारियां लंबे समय से चल रही थीं। 

5. 2006 में मनिथा नीति पसाराई (MNP) और नेशनल डेवलपमेंट फंड (NDF) नामक संगठन ने मिलकर इस्लामिक चरमपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट इंडिया (PFI) बनाया था। पहले यह सिर्फ दक्षिण भारत के राज्यों में सक्रिय था। बाद में यह UP-बिहार, मप्र, झारखंड समेत 23 राज्यों में फैलग गया। संगठन की राष्ट्रीय समिति है, जबकि राज्यों की अलग समितियां बनाई गईं। ग्राउंड लेवल पर बड़ी संख्या में इसके कार्यकर्ता फैले हैं। समिति हर तीन साल में इलेक्शन कराती है।

6. जुलाई में पटना के पास फुलवारी शरीफ में मिले आतंकी मॉड्यूल को लेकर भी छापेमारी की गई थी। फुलवारी शरीफ में PFI के सदस्यों के पास से इंडिया 2047 नाम का 7 पेज का एक डॉक्यूमेंट मिला था। इसमें अगले 25 साल में भारत को मुस्लिम राष्ट्र बनाने की पूरी प्लानिंग थी। जब्त डॉक्यमेंट में लिखा था कि '2047 में जब देश आजादी के 100 साल मना रहा होगा, तब तक भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाना है। इस दस्तावेज में ये भी लिखा है कि 10% मुस्लिम भी साथ दें, तो कायरों को घुटनों पर ला देंगे। इसके लिए इनके पास 4 लेयर का पूरा प्लान है।'

7. महाराष्ट्र एनआईए (Maharashtra NIA) ने खुलासा किया था कि पीएफआई ने बीजेपी के टॉप लीडर्स व आरएसएस को निशाना बनाने की साजिश रची थी। दशहरा पर आरएसएस मुख्यालय व बीजेपी नेताओं को निशाना बनाने की फिराक में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (Popular Front of India) था। पूरी तैयारियां थीं।

8. 22 सितंबर की रेड में ईडी ने कोझिकोड से PFI वर्कर शफीक पायथे को गिरफ्तार किया था। ईडी ने बताया कि पीएफआई ने पटना में 12 जुलाई को पीएम मोदी की रैली में हमला की साजिश रची थी, इसकी फंडिंग में शफीक पायथे भी था।  केंद्रीय एजेंसी के अनुसार पीएफआई के साजिशकर्ता यह चाहते थे कि अक्टूबर 2013 की घटना की पुनरावृत्ति हो। दरअसल, 2013 में पटना के गांधी मैदान में बीजेपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री गुजरात नरेंद्र मोदी की रैली में सिलसिलेवार बम ब्लास्ट हुए थे।

9. जांच एजेंसी एनआई के पास इस बात का भी इनपुट था कि कई राज्यों में पिछले कुछ महीनों से PFI बड़े स्तर पर ट्रेनिंग कैंप लगा रही है। तेलंगाना पुलिस की कोर्ट डायरी के मुताबिक, पीएफआई मुस्लिम बहुल इलाकों में लड़कों का ब्रेनवॉश करना, मार्शल आर्ट के जरिए नए लड़कों को आतंक की ट्रेनिंग, कुंगफू और कराटे सिखाकर आतंकियों को तैयार करना, कश्मीर मॉडल के तहत लड़कों को पत्थर चलाने की ट्रेनिंग देना जैसे कामों में शामिल हैं।   

10. पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया एक कट्टर इस्लामिक संगठन है। यह खुद को पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के अधिकार के लिए आवाज उठाने वाला बताता है, लेकिन देश के कई राज्यों में हुए दंगों में इस संगठन का कनेक्शन पाया गया है। पीएफआई को लेकर कहा जाता है कि इस संगठन का केरल मॉड्यूल ISIS के लिए काम करता था। केरल से इसके कई मेंबरों ने सीरिया और इराक में ISIS को ज्वॉइन किया था। 

11. पीएफआई की स्थापना 1993 में बने नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट से ही हुई है। 1992 में बाबरी मस्जिद ढहाने के बाद नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट नाम से एक संगठन बना था। इसके बाद 2006 में नेशनल डेमाक्रेटिक फ्रंट का विलय पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) में हो गया। हालांकि, ऑफिशियल इस संगठन की शुरुआत 17 फरवरी, 2007 में हुई। यह संगठन केरल से ही संचालित होता है लेकिन पूरे देश में इसके लोग फैले हुए हैं। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के मुताबिक पीएफआई देश के 23 राज्यों में सक्रिय है। 

12. पीएफआई को स्‍टूडेंट्स इस्‍लामिक मूवमेट ऑफ इंडिया यानी सिमी का ही विकल्प माना जाता है। 1977 में बने सिमी को 2006 में बैन कर दिया गया। उसके बाद मुसलमानों, आदिवासियों और दलितों के हक की बात करने के लिए इस संगठन की स्थापना हुई, लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। ये एक कट्टर इस्लामिक संगठन है, जिसका नाम देशभर में हुए कई दंगों में सामने आ चुका है। इसकी संदिग्ध गतिविधियों के चलते कई बार इसे बैन करने की मांग उठ चुकी है। 

13. PFI को खाड़ी देशों के अलावा भारत के ही कई मुस्लिम कारोबारियों से इन गैर कानूनी गतिविधियों को चलाने के लिए फंडिंग हो रही थी। इसी के चलते छापेमारी में NIA के साथ ED को भी शामिल किया गया।

14.  2016 में बेंगलुरु के आरएसएस नेता रुद्रेश की हत्या दो अज्ञात बाइक सवारों ने की थी। शहर के शिवाजीनगर में हुए इस मर्डर में पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार किया था और ये चारों पीएफआई से जुड़े थे।

15. पीएफआई पर उत्तरी कन्नूर में एक ट्रेनिंग कैंप चलाने का आरोप भी लग चुका है। 2013 में कन्नूर पुलिस ने बताया था कि इस कैंप से तलवार, बम, देसी पिस्टल और आईईडी ब्लास्ट में काम आने वाली चीजें बरामद हुई थीं। दिल्ली के शाहीन बाग से लेकर मप्र में खरगोन दंगों और उदयपुर में टेलर का सिर कलम करने जैसे मामलों में भी PFI की ही भूमिका सामने आई थी।

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