सुप्रीम कोर्ट ने कृषि कानूनों पर आगामी आदेश तक रोक लगा दी है, लेकिन किसान अपनी मांग पर अड़े हैं। उनका साफ शब्दों में कहना है कि सरकार कृषि कानूनों को वापस ले। इस बीच किसानों ने सिंघु बॉर्डर पर कृषि कानूनों की कॉपियां जलाकर लोहड़ी का पर्व मनाया।

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने कृषि कानूनों पर आगामी आदेश तक रोक लगा दी है, लेकिन किसान अपनी मांग पर अड़े हैं। उनका साफ शब्दों में कहना है कि सरकार कृषि कानूनों को वापस ले। इस बीच किसानों ने सिंघु बॉर्डर पर कृषि कानूनों की कॉपियां जलाकर लोहड़ी का पर्व मनाया।

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अपडेट्स...

कृषि कानूनों के खिलाफ टिकरी बॉर्डर पर किसानों का विरोध-प्रदर्शन आज 49वें दिन भी जारी है।

"हमने समिति के गठन की मांग नहीं की"
सिंघु बॉर्डर पर बैठे किसानों ने कहा, हमने समिति के गठन की मांग नहीं की। इसके पीछे केंद्र सरकार का हाथ है। हम सिद्धांत तौर पर समिति के खिलाफ हैं। प्रदर्शन से ध्यान भटकाने के लिए सरकार ने ये तरीका निकाला है।

15 जनवरी को होनी है बात
किसानों ने कहा कि 15 जनवरी को सरकार के साथ होने वाली बातचीत में वे शामिल होंगे। बता दें कि इससे पहले सरकार और किसानों के बीच आठ बार बातचीत हो चुकी है, लेकिन हर बार कोई हल नहीं निकला। 

आंदोलन में कोई बदलाव नहीं
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी किसानों ने साफ कर दिया कि उनके कार्यक्रमों में कोई बदलाव नहीं होगा। उनका 18 जनवरी को महिला किसान दिवस मनाने, 20 जनवरी को श्री गुरु गोविंद सिंह की याद में शपथ लेने और 23 जनवरी को आजाद हिंद किसान दिवस पर देशभर में राजभवन का घेराव करने का कार्यक्रम जारी रहेगा। 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के दिन देशभर के किसान दिल्ली पहुंचकर शांतिपूर्ण तरीके से किसान गणतंत्र परेड आयोजित करेंगे।

सरकार ने गठित की है समिति
कृषि कानूनों पर विवाद को सुलझाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 4 सदस्यों की समिति का गठन किया है। समिति के सदस्यों में भारतीय किसान यूनियन के प्रेसिडेंट भूपेंद्र सिंह मान, शेतकारी संगठन के अनिल घनवंत, कृषि वैज्ञानिक अशोक गुलाटी और अंतरराष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान के प्रमोद के जोशी हैं।