नई दिल्ली. कृषि कानूनों को लेकर किसानों के आंदोलन का आज तीसरा दिन है। दिल्ली पुलिस ने किसानों को बुराड़ी के निरंकारी ग्राउंड में प्रदर्शन की अनुमति दे दी है, लेकिन किसान अभी सिंघु बॉर्डर पर ही डटे हुए हैं। पूरी रात उन्होंने सिंघु बॉर्डर पर ही गुजारी। आज किसान नेताओं की बैठक हुई, जिसमें तय हुआ कि आंदोलन को कैसे आगे बढ़ाना है। किसान यूनियन के पंजाब के अध्यक्ष जगजीत सिंह का कहना है कि सरकार जब तक हमारी मांगे नहीं मानती है, काले कानून को वापस नहीं लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। 

3 दिसंबर को मिलने का न्योता भेजा है: केंद्रीय मंत्री

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा,  हमने किसान यूनियनों को 3 दिसंबर को मिलने का न्योता भेजा है। उम्मीद है कि वे 3 मिलने आएंगे। वहीं हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर ने किसान आंदोलन में खालिस्तान समर्थकों की मौजूदगी का दावा किया है। खट्टर ने कहा, भीड़ में उपद्रवियों के शामिल होने का इनपुट मिला है। वीडियो में लोग नारा लगा रहे थे, जब इंदिरा गांधी को ये कर सकते हैं, तो मोदी को क्यों नहीं कर सकते। हमारे पास पूरी रिपोर्ट है। जैसे ही जानकारी पुख्ता होगी, हम इसका खुलासा करेंगे।

उत्तर प्रदेश में भारतीय किसान यूनियन ने भी दिल्ली के लिए मार्च किया है। किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार किसानों के मसले को हल करने में नाकाम रही है। हम अब दिल्ली जा रहे हैं।

"बुराड़ी के निरंकारी ग्राउंड में कर सकते हैं प्रदर्शन"

दिल्ली पुलिस के जनसंपर्क अधिकारी ईश सिंघल ने कहा, किसान नेताओं से बातचीत के बाद दिल्ली पुलिस ने उनको शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की अनुमति दे दी है, इसके लिए बुराड़ी के निरंकारी ग्राउंड को निर्धारित किया गया है। उनसे(किसानों) ये अपील है कि वो शांति बनाए रखें। 

कितने राज्यों के किसान शामिल हैं?

पंजाब के किसान सबसे आगे हैं। फिर हरियाणा के किसान हैं। उत्तर प्रदेश के किसानों ने भी शुक्रवार को हाईवे जाम करने का आह्वान किया है। वहीं मध्य प्रदेश के किसान भी सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर के नेतृत्व में दिल्ली पहुंच रहे हैं। बताया जा रहा है कि देशभर से करीब 500 संगठनों का समर्थन है।

3 कानून कौन से हैं, जिसका किसान विरोध कर रहे हैं

1- किसान उपज व्‍यापार एवं वाणिज्‍य (संवर्धन एवं सुविधा) विधेयक, 2020  (The Farmers Produce Trade and Commerce (Promotion and Facilitation) Bill 2020)

अभी क्या व्यवस्था- किसानों के पास फसल बेचने के ज्यादा विकल्प नहीं है। किसानों को एपीएमसी यानी कृषि उपज विपणन समितियों  में फसल बेचनी होती है। इसके लिए जरूरी है कि फसल रजिस्टर्ड लाइसेंसी या राज्य सरकार को ही फसल बेच सकते हैं। दूसरे राज्यों में या ई-ट्रेडिंग में फसल नहीं बेच सकते हैं।

नए कानून से क्या फायदा- 
1- नए कानून में किसानों को फसल बेचने में सहूलियत मिलेगी। वह कहीं पर भी अपना अनाज बेच सकेंगे। 
2- राज्यों के एपीएमसी के दायरे से बाहर भी अनाज बेच सकेंगे। 
3- इलेक्ट्रॉनिग ट्रेडिंग से भी फसल बेच सकेंगे। 
4- किसानों की मार्केटिंग लागत बचेगी। 
5- जिन राज्यों में अच्छी कीमत मिल रही है वहां भी किसाने फसल बेच सकते हैं।
6- जिन राज्यों में अनाज की कमी है वहां भी किसानों को फसल की अच्छी कीमत मिल जाएगी।

2- किसानों (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) का मूल्‍य आश्‍वासन अनुबंध एवं कृषि सेवाएं विधेयक, 2020 (The Farmers (Empowerment and Protection) Agreement of Price Assurance and Farm Services Bill 2020)

अभी क्या व्यवस्था है- यह कानून किसानों की कमाई पर केंद्रित है। अभी किसानों की कमाई मानसून और बाजार पर निर्भर है। इसमें रिस्क बहुत ज्यादा है। उन्हें मेहनत के हिसाब से रिटर्न नहीं मिलता। 

नए कानून से क्या फायदा- 
1- नए कानून में किसान एग्री बिजनेस करने वाली कंपनियों, प्रोसेसर्स, होलसेलर्स, एक्सपोर्टर्स और बड़े रिटेलर्स से एग्रीमेंट कर आपस में तय कीमत में फसल बेच सकेंगे। 
2- किसानों की मार्केटिंग की लागत बचेगी। 
3- दलाल खत्म हो जाएंगे।
4- किसानों को फसल का उचित मूल्य मिलेगा।
5- लिखित एग्रीमेंट में सप्लाई, ग्रेड, कीमत से संबंधित नियम और शर्तें होंगी। 
6- अगर फसल की कीमत कम होती है, तो भी एग्रीमेंट के तहत किसानों को गारंटेड कीमत मिलेगी। 

3- आवश्‍यक वस्‍तु (संशोधन) विधेयक, 2020 (The Essential Commodities (Amendment) Bill 

अभी क्या व्यवस्था है- अभी कोल्ड स्टोरेज, गोदामों और प्रोसेसिंग और एक्सपोर्ट में निवेश कम होने से किसानों को लाभ नहीं मिल पाता। अच्छी फसल होने पर किसानों को नुकसान ही होता है। फसल जल्दी सड़ने लगती है।

नए कानून से क्या फायदा-  
1- नई व्यवस्था में कोल्ड स्टोरेज और फूड सप्लाई से मदद मिलेगी जो कीमतों की स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलेगी। 
2- स्टॉक लिमिट तभी लागू होगी, जब सब्जियों की कीमतें दोगुनी हो जाएंगी।  
3- अनाज, दलहन, तिलहन, खाद्य तेलों, प्याज और आलू को आवश्यक वस्तुओं की सूची से हटाया गया है। 
4- युद्ध, प्राकृतिक आपदा, कीमतों में असाधारण वृद्धि और अन्य परिस्थितियों में केंद्र सरकार नियंत्रण अपने हाथ में ले लेगी।