भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण का कहना है कि उसने जड़ी बूटियों और मसालों में उच्च कीटनाशक अवशेष मिलाने की अनुमति नहीं दी है। मीडिया रिपोर्टों में किए गए दावे बेबुनियाद हैं।  

नेशनल डेस्क। जड़ी बूटियों और मसालों में उच्च कीटनाशक अवशेष मिलाए जाने की परमीशन देने की रिपोर्ट का भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण ने खंडन किया है। उनका कहना है कि मानक के अनुरूप जड़ी बूटियां और मसाले बनाने की अनुमति दी है। मीडिया रिपोर्टों में किए गए दावे बेबुनियाद हैं। रिपोर्ट में कही गई बातें दुर्भावना से प्रेरित है।

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खाद्य सुरक्षा नियामक ने एक प्रेस नोट में कहा कि भारत में दुनिया में अधिकतम अवशेष सीमा सबसे बड़े मानकों के रूप में देखी जाती है। यह भी बताया गया कि तमाम खाद्य वस्तुों के लिए अलग-अलग मानक के अनुरूप पेस्टीसाइड डाले जाते हैं। खाद्य नियामक प्राधिकरण पर मसालों और पाक जड़ी-बूटियों में एमआरएल को 10 गुना बढ़ाकर कम करने का आरोप लगाया है।

कीटनाशकों के एमआरएल को 10 गुना बढ़ाने का दावा
एक गैर-सरकारी संगठन ने एफएसएसएआई की ओर से जारी आदेश में बताया है कि मसालों और जड़ी-बूटियों में कुछ कीटनाशकों के एमआरएल को मानक से काफी बढ़ा दिया गया है। खाद्य विभाग ने 0.01 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम से बढ़ाकर 0.1 मिलीग्राम प्रति कर दिया है। मीडिया रिपोर्ट ने अपने सर्वे में यह दावा किया है। हालांकि इसका को सपष्ट सबूत नहीं दिया है।

एफएसएसएआई ने 8 अप्रैल के आदेश में कहा था ऐसे मामलों में जहां कीटनाशक सेंट्रल पेस्टीसाइड बोर्ड रजिस्ट्रेशन कमेटी (CIBRC) के साथ रजिस्टर्ड हैं कोडेक्स के तहत दिए गए निर्देश पर MRL लागू होंगे। कोडेक्स एफएओ FAO की ओर से जारी अंतर्राष्ट्रीय खाद्य मानकों का एक ग्रुप है। आदेश में कहा गया है कि यदि कीटनाशक सीआईबीआरसी के साथ रजिस्टर्ड नहीं हैं तो 0.1 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम का एमआरएल मसालों और पाक जड़ी-बूटियों पर लागू होगा।