17वीं लोकसभा में चुनकर नहीं आ सके 230 सांसदों से सरकारी आवास खाली कराने के लिए जुलाई में इन सभी पूर्व सांसदों को बंगला खाली करने का नोटिस दिया गया था। 

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने बतौर पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवगौड़ा को लुटियन दिल्ली में एक ही सरकारी आवास रखने की अनुमति देते हुए, उनसे दूसरा आवास खाली करने के लिए कहा है। आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय ने नियमों का हवाला देकर देवगौड़ा को एक ही सरकारी बंगले का हकदार बताया है। उल्लेखनीय है कि 16वीं लोकसभा के दौरान वरिष्ठ सांसद के तौर पर देवगौड़ा को सरकारी बंगला आवंटित किया गया था। हालांकि, 17वीं लोकसभा चुनाव हारने के बाद पूर्व सांसदों से सरकारी बंगला खाली कराने की प्रक्रिया के तहत देवगौड़ा को भी मंत्रालय के संपदा निदेशालय ने बंगला खाली करने का नोटिस जारी किया था।

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देवगौड़ा ने बताया खुद सरकारी आवास का हकदार 

सूत्रों के अनुसार इस नोटिस के जवाब में देवगौड़ा ने पूर्व प्रधानमंत्री के रूप में खुद को लुटियन दिल्ली में सरकारी आवास का हकदार बताते हुए, उन्हें सफदर जंग लेन स्थित बंगले का आवंटन बरकरार रखने का अनुरोध किया था। निदेशालय ने उनके इस अनुरोध को तो स्वीकार कर लिया, लेकिन प्रधानमंत्री के कार्यकाल के दौरान उन्हें कार्यालयी उपयोग के लिए वीपी हाऊस में आवंटित किया गया आवास खाली करने को कहा है। नियम के अनुसार पूर्व प्रधानमंत्री सिर्फ एक ही सरकारी आवास (टाइप 7) के हकदार हैं। लिहाजा देवगौड़ा को दूसरा आवास छोड़ने के लिए कहा गया है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक 24 अक्टूबर तक सरकारी बंगला नहीं छोड़ने वाले पूर्व सांसदों की संख्या लगभग 25 थी। 

बंगलों के दुरुपयोग को रोकने के लिए प्रावधान

उल्लेखनीय है कि 17वीं लोकसभा में चुनकर नहीं आ सके 230 सांसदों से सरकारी आवास खाली कराने के लिए जुलाई में इन सभी पूर्व सांसदों को बंगला खाली करने का नोटिस दिया गया था। बंगलों के दुरुपयोग को सख्ती से रोकने के लिए इस कानून के प्रावधानों के तहत माकपा महासचिव सीताराम येचुरी को भी सरकारी आवास से किसी संगठन का संचालन बंद करने के लिए निदेशालय ने नोटिस दिया है। येचुरी को राज्यसभा के सांसद के रूप में केनिंग लेन स्थित बंगला आवंटित किया था।

राज्यसभा की सदस्यता समाप्त होने के बाद अब वह राष्ट्रीय पार्टी के प्रमुख की हैसियत से इस बंगले में रह रहे हैं। इस बंगले से ही वामदलों के किसान प्रकोष्ठ के कार्यालय का भी संचालन हो रहा था। निदेशालय के निर्देश पर अब येचुरी ने किसान सभा के कार्यालय को हटा दिया है।

(यह खबर समाचार एजेंसी भाषा की है, एशियानेट हिंदी टीम ने सिर्फ हेडलाइन में बदलाव किया है।)