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ट्रेन में जाते वक्त कमर में लगी गोली, एक साल तक खड़े भी नहीं हो पाए, फिर भारत को ऐसे बनाया चैंपियन

हरियाणा कैबिनेट विस्तार में हॉकी टीम के पूर्व कप्तान संदीप सिंह को राज्य मंत्री बनाया गया है। कुरुक्षेत्र के शाहाबाद में जन्में संदीप ने सालों तक भारतीय हॉकी की सेवा की है। संदीप की जीवन बहुत ही चुनौती भरा रहा है, पर उन्होंने कभी भी हार नहीं मानी और अपनी मेहनत के दम पर भारतीय टीम तक का सफर तय किया। 

Haryana Cabinet expansion former hockey player Sandeep Singh becomes minister
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New Delhi, First Published Nov 14, 2019, 2:29 PM IST
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चंडीगढ़. हरियाणा कैबिनेट विस्तार में हॉकी टीम के पूर्व कप्तान संदीप सिंह को राज्य मंत्री बनाया गया है। कुरुक्षेत्र के शाहाबाद में जन्में संदीप ने सालों तक भारतीय हॉकी की सेवा की है। संदीप की जीवन बहुत ही चुनौती भरा रहा है, पर उन्होंने कभी भी हार नहीं मानी और अपनी मेहनत के दम पर भारतीय टीम तक का सफर तय किया। संदीप को ट्रेन में सफर के दौरान एक बार गोली भी लगी थी। इस घटना के बाद संदीप का करियर लगभग समाप्त माना जा रहा था, पर संदीप ने इस कठिनाई पर भी पार पाया और भारतीय हॉकी में अपनी अमिट छाप छोड़ी। 

पिहोवा सीट से बने विधायक
2019 के लोकसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें हरियाणा की पिहोवा विधानसभा सीट से उम्मीदवार घोषित किया था। हॉकी के मैदान के बाद राजनीति के अखाड़े में भी संदीप ने किसी को निराश नहीं किया और 5314 वोटों से शानदार जीत दर्ज की। 

कोच से थे परेशान होकर छोड़ना चाहते थे हॉकी

शुरुआती दिनों में संदीप अपने कोच करतार सिंह से ही इतना परेशान हो गए थे कि वे हॉकी छोड़ने वाले थे। इस समय उनके भाई बिक्रमजीत सिंह ने उनका साथ दिया और कड़ी मेहनत के दम पर संदीप सिंह धीरे-धीरे भारतीय हॉकी में उभरने लगे। साल 2004 में संदीप 'सुल्तान अजलान शाह हॉकी टूर्नामेंट' के लिए भारतीय टीम का हिस्सा बने। पर मुसीबतें यहां भी उनका इंतजार कर रही थी। भारतीय हॉकी टीम उस टूर्नामेंट में आखिरी स्थान पर रही थी और संदीप सिंह का प्रदर्शन भी बहुत अच्छा नहीं था। 

जब ट्रेन में लगी थी गोली
संदीप विश्व कप में हिस्सा लेने के लिए कालका शताब्दी एक्सप्रेस से दिल्ली आ रहे थे। यहां से उन्हें अपने साथियों के साथ जर्मनी जाना था। इस दौरान भी खराब किस्मत ने संदीप का साथ नहीं छोड़ा। दुर्भाग्यवश RPF के एक जवान की बंदूक से गोली चल गई और जाकर संदीप सिंह के कमर के निचले हिस्से में लगी। इसके बाद संदीप करीब एक साल तक हॉस्पिटल में रहे। इधर संदीप अपनी चोट से जूझ रहे थे उधर भारतीय टीम के हाल बेहाल थे। 2008 में पहली बार भारतीय टीम ओलंपिक तक के लिए क्वालीफाई नहीं कर पाई थी। 

2009 में संदीप सिंह ने की वापसी

2009 के अंत तक संदीप 145 किलो मीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ड्रैग फ्लिक करने लगे। अपने दमदार ड्रैग फ्लिक की वजह से संदीप 'फ्लिकर सिंह' के नाम से मशहूर हो गए। अपने समय में दुनिया के सर्वश्रेष्ठ ड्रैग फ्लिकर रहे संदीप ने एक बार फिर भारत की राष्ट्रीय हॉकी टीम में वापसी की। संदीप को 2009 के 'सुल्तान अजलान शाह टूर्नामेंट' में टीम की कप्तानी भी मिली। संदीप सिंह की कप्तानी में भारत ने चौथी बार यह खिताब अपने नाम किया। संदीप के जीवन को लेकर साल 2018 में 'सूरमा' फिल्म भी बनी है। 

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