मौजूदा रबी, या सर्दियों की फसल, मार्केटिंग सीजन के दो सप्ताह के भीतर प्राइवेट प्लेयर्स गेहूं की खरीद लगभग 1 लाख टन तक पहुंच गई, जो कि पंजाब में बुधवार तक हुई सभी गेहूं खरीद का 6 फीसदी था।

नेशनल डेस्क। एग्री सेक्टर के प्राइवेट प्लेयर्स ने इस साल पंजाब से सबसे ज्यादा गेहूं खरीदा है, जो एक रिकॉर्ड ब्रेकिंग है। वास्तव में इस मुख्य कारण है यूक्रेन-रूस वॉर, जो दुनिया के सबसे बड़े गेहूं एक्सपोर्टर हैं। जिसकी वजह से प्राइवेट कंपनियों को अब पंजाब की ओर रुख करना पड़ रहा है। आंकड़ों की मानें तो बीते दो हफ्तों में प्राइवेट कंपनियों ने एक लाख टन से ज्यादा गेंहूं खरीदा है। आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर गेंहूं खरीद के किस तरह के आंकड़ें देखने को मिल रहे हैं।

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दो सप्ताह में एक लाख टन गेहूं खरीदा
पंजाब राज्य देश के किसी भी पोर्ट से काफी दूर है, और इसलिए मल्टी नेशनल फूड एक्सपोर्ट कंपनियों द्वारा फसल खरीदना थोड़ा मुश्किल माना जाता है। फिर भी, उन्हें यूक्रेन में युद्ध के कारण पंजाब के गेहूं किसानों को एमएसपी से अधिक पेमेंट करने से नहीं रोका है। आंकड़ों की मानें तो दो सप्ताह के भीतर प्राइवेट प्लेयर्स ने लगभग 1 लाख टन तक गेंहूं खरीदा है, जो पंजाब में बुधवार तक हुई सभी गेहूं खरीद का 6 फीसदी था।

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किसने कितना खरीदा गेहूं
पंजाब की मंडियों में 13 अप्रैल तक कुल 20.6 लाख टन गेहूं की आवक हुई। सरकारी एजेंसियों जैसे पंग्रेन, पुनसुप, पंजाब स्टेट वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन, मार्कफेड और भारतीय खाद्य निगम ने 16.8 लाख टन गेहूं खरीदा है। इसमें से निजी कंपनियों ने 99,637 टन खरीदा है। उन्होंने 2,050 रुपए प्रति क्विंटल की ऑफर किया, जो 2,015 रुपए के एमएसपी से अधिक है। पंजाब सरकार के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा कि कुल गेहूं खरीद ने भी 15 साल का रिकॉर्ड तोड़ा है। अधिकारी ने कहा कि 13 अप्रैल को गेहूं की कुल खरीद 17 लाख टन तक पहुंच गई, जो पिछले 15 वर्षों में इस तारीख को सबसे ज्यादा खरीद थी।

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871 करोड़ रुपए के एक और राउंड को मंजूरी
उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार ने गेहूं खरीद के लिए किसानों के बैंक अकाउंट्स में 828 करोड़ रुपए का भुगतान किया है। उन्होंने कहा कि 871 करोड़ रुपए के एक और राउंड को मंजूरी दी गई है और इसे किसानों के खातों में जमा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि एक लाख टन गेहूं की अब तक की रिकॉर्ड निजी खरीद पहले ही हो चुकी है, जो पहले के वर्षों में इसी तारीख को हुई खरीद से कहीं अधिक है।