DRDO द्वारा डिजाइन किया गया पहला स्वदेशी टर्बो जेट इंजन तैयार हो गया है। 350 किलोग्राम थ्रस्ट क्लास के इस इंजन का निर्माण हैदराबाद की आजाद इंजीनियरिंग ने किया है। इसे भारत के एयरोस्पेस और रक्षा क्षेत्र में एक बड़ी कामयाबी माना जा रहा है।
नई दिल्ली [भारत], 23 जुलाई (एएनआई): रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) के गैस टरबाइन रिसर्च एस्टेब्लिशमेंट (GTRE) द्वारा डिजाइन किया गया 350 किलोग्राम थ्रस्ट क्लास का पहला स्वदेशी एक्सपेंडेबल टर्बो जेट इंजन सफलतापूर्वक विकसित कर लिया गया है। जारी विज्ञप्ति के अनुसार, GTRE ने इस इंजन के निर्माण और असेंबली के लिए हैदराबाद की आजाद इंजीनियरिंग को एक इंडस्ट्री पार्टनर के रूप में चुना था।
22 जुलाई को, आजाद इंजीनियरिंग द्वारा इस इंजन को सफलतापूर्वक तैयार कर GTRE को सौंप दिया गया, जो भारत के एयरोस्पेस और रक्षा इकोसिस्टम के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। यह डिलीवरी वर्षों की सटीक इंजीनियरिंग, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और भारत के वैज्ञानिक और औद्योगिक समुदायों के बीच घनिष्ठ साझेदारी का परिणाम है।
कुछ ही देशों को है जेट इंजन तकनीक में महारत
जेट इंजन तकनीक में दुनिया के कुछ ही देशों को महारत हासिल है और इसे दुनिया के सबसे परिष्कृत इंजीनियरिंग विषयों में से एक माना जाता है, जिसके लिए असाधारण सटीकता, एडवांस्ड मेटलर्जी और बेहतर मैन्युफैक्चरिंग स्टैंडर्ड्स की जरूरत होती है। DRDO के डिजाइन पर आधारित इतने जटिल सिस्टम की डिलीवरी भारतीय रक्षा उद्योग की बढ़ती तकनीकी क्षमताओं को दर्शाती है।
आजाद इंजीनियरिंग के सीईओ श्री राकेश चोपदार ने यह इंजन प्रतिष्ठित वैज्ञानिक और महानिदेशक (एयरोनॉटिकल सिस्टम्स) के. राजलक्ष्मी मेनन और उत्कृष्ट वैज्ञानिक और निदेशक GTRE एसवी रमनमूर्ति को सौंपा।
डीआरडीओ प्रमुख ने की साझेदारी की सराहना
रक्षा सचिव और सचिव, रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग और डीआरडीओ के अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह ने GTRE और इंडस्ट्री की साझेदारी की सराहना की, जिसने इस विजन को एक ऐतिहासिक मील के पत्थर में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। (एएनआई)
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