भारत और रूस की संयुक्त कंपनी IRRPL ने भारतीय सेना के लिए 35,000 कलाश्निकोव एके-203 (AK-203) असॉल्ट राइफल्स बनाकर दे दिए हैं।

नई दिल्ली। चीन हो या पाकिस्तान, भारत के दुश्मनों को सावधान करने वाली खबर आई है। भारत और रूस की संयुक्त कंपनी IRRPL (Indo-Russian Rifles Private Limited) ने भारतीय सेना के लिए 35,000 कलाश्निकोव एके-203 (AK-203) असॉल्ट राइफल्स बनाकर दे दिए हैं।

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यह घोषणा रूस की सरकारी कंपनी रोस्टेक ने की है। रोबोरोनएक्सपोर्ट के डायरेक्टर जनरल अलेक्जेंडर मिखीव ने एक बयान में कहा, "रूस की ओर से रोबोरोनएक्सपोर्ट द्वारा सह-स्थापित IRRPL ने भारत में AK-203 कलाश्निकोव असॉल्ट राइफलों के उत्पादन का पहला चरण पूरा किया है। समय सीमा के भीतर भारतीय सेना के लिए 35,000 कलाश्निकोव असॉल्ट राइफलों का उत्पादन हुआ है।"

भरोसेमंद और इस्तेमाल में आसान है AK-203 असॉल्ट राइफल

AK-203 असॉल्ट राइफल से भारतीय सेना द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले 7.62×39mm कारतूस यूज हो सकते हैं। यह AK-200 राइफल का वर्जन है। यह बेहद भरोसेमंद और इस्तेमाल में आसान राइफल है। इसे अधिक रख-रखाव की जरूरत नहीं होती।

भारतीय सेना को चाहिए 6 लाख AK-203 राइफल

भारतीय सेना को 6 लाख AK-203 राइफल की जरूरत है। इसके लिए रूस और भारत के बीच समझौता हुआ है। डील के अनुसार उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले के कोरवा में फैक्ट्री लगाई गई है। 6,01,427 राइफल के लिए 5,124 करोड़ में डील हुई थी। पहले 70 हजार AK-203 राइफल 7.62x39mm के कारतूस फायर करने लायक होंगे।

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भारत और रूस के बीच AK-203 असॉल्ट राइफलों की खरीद के लिए दिसंबर 2021 में समझौता हुआ था। 5,000 राइफलों के पहले बैच में केवल 5 प्रतिशत स्वदेशी घटक थे। 32 महीनों में 70,000 की प्रारंभिक खेप पूरी होने पर ये बढ़कर 70 प्रतिशत हो जाएंगे। 128 महीनों में राइफल के स्वदेशी घटक 100 प्रतिशत हो जाएंगे।

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