INS विक्रांत के नेवी में शामिल होने के बाद अब भारत एक और के एयरक्राफ्ट कैरियर INS विशाल बनाने जा रहा है। बता दें कि यह एयरक्राफ्ट कैरियर INS विक्रांत से ज्यादा लंबा-चौड़ा, ऊंचा और वजन होगा। INS विशाल भारत का तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर होगा। 

INS Vishal : INS विक्रांत के नेवी में शामिल होने के बाद अब भारत एक और के एयरक्राफ्ट कैरियर INS विशाल बनाने जा रहा है। बता दें कि यह एयरक्राफ्ट कैरियर INS विक्रांत से ज्यादा लंबा-चौड़ा, ऊंचा और वजन होगा। INS विशाल भारत का तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर होगा, जबकि INS विक्रांत के बाद भारत में बना दूसरा एयरक्राफ्ट कैरियर होगा। INS विशाल को भारतीय नौसेना के कोचीन शिपयार्ड में बनाने की तैयारी है।

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इतना वजनी होगा INS विशाल :
रिपोर्ट्स के मुताबिक, INS विशाल 65 हजार टन वजनी हो सकता है। इसके अलावा इस युद्धपोत कैरियर की लंबाई 284 मीटर होगा। यानी लंबाई और वजन के लिहाज से ये भारत का अब तक का सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर होगा। INS विक्रमादित्य और विक्रांत का वजन 45 हजार टन के करीब है। INS विशाल पर 55 फाइटर प्लेन तैनात हो सकेंगे। वहीं INS विक्रमादित्य पर 35 और विक्रांत पर 30 फाइटर प्लेन तैनात हो सकते हैं। INS विक्रांत की लंबाई 262 मीटर, जबकि INS विक्रमादित्य की लंबाई भी 284 मीटर है। 

कितनी होगा INS विशाल की लागत?
INS विशाल एक बड़ा युद्धपोत है, इसलिए इस प्रोजेक्ट में काफी पैसा खर्च होगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसकी लागत करीब 55 हजार करोड़ रुपए है। इस एयरक्रॉफ्ट पर 2300 क्रू मेंबर रह सकेंगे। वहीं INS विक्रांत की लागत करीब 20 हजार करोड़ रुपए है। 

कब तक तैयार हो जाएगा INS विशाल?
INS विशाल के 2030 तक नेवी में शामिल होने की उम्मीद है। बता दें कि मई 2012 में नेवी चीफ एडमिरल निर्मल वर्मा ने कहा था कि देश में बनने वाले तीसरे एयरक्राफ्ट कैरियर के लिए स्टडी की जा रही है। बता दें कि 2015 में ही INS विशाल की डिजाइन के लिए नेवी ने 4 देशों ब्रिटेन, अमेरिका, फ्रांस और रूस की डिफेंस कंपनियों से संपर्क किया था। नेवी ने इन कंपनियों से वॉरशिप की टेक्निकल और लागत से जुड़ी जानकारी मांगी थी।

आखिर क्यों है INS विशाल की जरूरत?
भारत को अपने समुद्र तटों की सुरक्षा के लिए बड़े और मॉर्डर्न तकनीक वाले एयरक्राफ्ट कैरियर्स की जरूरत है। पिछले कुछ सालों में भारत के आसपास के समुद्री इलाकों खास कर हिंद महासागर में चीन अपनी पैठ बढ़ाने की लगातार कोशिश कर रहा है। ऐसे में भारत के पास INS विशाल INS की तरह अत्याधुनिक तकनीक से लैस युद्धपोत होना बेहद जरूरी है। 

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