वेजिटेरियन होने पर रोका मेडिक्लेम, कंपनी का तर्क सुन आप भी नहीं रोक पाएंगे हंसी

| Nov 28 2022, 01:17 PM IST

वेजिटेरियन होने पर रोका मेडिक्लेम, कंपनी का तर्क सुन आप भी नहीं रोक पाएंगे हंसी

सार

आपने भी बीमा कंपनियों से लाखों रुपए का मेडिक्लेम (Mediclaim) लिया होगा, लेकिन कभी सोचा है कि कोई कंपनी सिर्फ इसलिए आपका मेडिक्लेम रिजेक्ट कर दे, क्योंकि आप वेजिटेरियन (शाकाहारी) हैं। लेकिन ऐसा हुआ है। दरअसल, अहमदाबाद में बीमा कंपनी ने एक शख्स को सिर्फ इसलिए क्लेम देने से मना कर दिया, क्योंकि वो शाकाहारी है।

Mediclaim Rejection: आपने भी बीमा कंपनियों से लाखों रुपए का मेडिक्लेम (Mediclaim) लिया होगा, लेकिन कभी सोचा है कि कोई कंपनी सिर्फ इसलिए आपका मेडिक्लेम रिजेक्ट कर दे, क्योंकि आप वेजिटेरियन (शाकाहारी) हैं। लेकिन ऐसा हुआ है। दरअसल, अहमदाबाद में बीमा कंपनी ने एक शख्स को सिर्फ इसलिए क्लेम देने से मना कर दिया, क्योंकि वो शाकाहारी है। इसके लिए कंपनी ने जो तर्क दिया, उसे सुनकर आप भी अपनी हंसी नहीं रोक पाएंगे।

जानें कब का है मामला?
बता दें कि यह मामला 7 साल पहले यानी 2015 का है। अहमदाबाद के रहने वाले मीत ठक्कर को मतली के साथ ही चक्कर आने, कमजोरी और बॉडी के बाएं हिस्से में भारीपन की शिकायत थी। इसके लिए जब उन्होंने अपना इलाज कराया तो उन्हें (Transient Iscaemic Attack (TIA) नामक बीमारी का पता चला। इसके इलाज में ठक्कर के करीब 1 लाख रुपए खर्च हो गए। 

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बीमा कंपनी का अजीबोगरीब तर्क?
इस खर्च के लिए मीत ठक्कर ने जब अपनी बीमा कंपनी न्यू इंडिया इंश्योरेंस से मेडिक्लेम मांगा तो कंपनी ने उनका मेडिक्लेम रिजेक्ट कर दिया। कंपनी ने अपने पर्सनल डॉक्टर की रिपोर्ट के आधार पर ठक्कर से कहा कि उन्हें यह बीमारी विटामिन B12 की कमी के चलते हुई है। चूंकि वो शाकाहारी हैं, इसलिए उनके शरीर में इस विटामिन की कमी हुई, इसके लिए उन्हें नॉनवेज फूड खाना चाहिए था। 

कंज्यूमर कमीशन ने लगाई बीमा कंपनी को फटकार :  
कंपनी से मेडिक्लेम रिजेक्ट होने के बाद मीत ठक्कर ने अहमदाबाद के उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (Consumer Dispute Rederessal Commission) में बीमा कंपनी के खिलाफ मुकदमा ठोक दिया। मामले की सुनवाई के बाद कमीशन ने कहा कि सुनवाई के बाद कमीशन ने कहा कि वेजिटेरियन लोगों को विटामिन B12 की कमी हो सकती है, लेकिन ठक्कर के केस में ये नहीं कहा जा सकता है कि इसी के चलते उन्हें ये दिक्कत हुई। इसमें उनकी कोई गलती नहीं थी। आयोग ने कहा कि डॉक्टर की रिपोर्ट का मतलब ये था कि आमतौर पर शाकाहारी लोगों में इस विटामिन की कमी होती है, लेकिन बीमा कंपनी ने इसका अलग अर्थ निकालते हुए क्लेम रिजेक्ट कर दिया।

आयोग ने बीमा कंपनी पर लगाया जुर्माना : 
मीत ठक्कर का क्लेम रिजेक्ट करने के लिए उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बीमा कंपनी को अक्टूबर, 2016 से 9% ब्याज के साथ 1 लाख रुपए का भुगतान करने के आदेश दिए। आयोग ने अपने फैसले में ये भी कहा कि ठक्कर को हुई मानसिक पीड़ा और उनके लीगल खर्च के लिए कंपनी 5000 रुपए अलग से भुगतान करे।   

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