अयोध्या रामजन्मभूमि विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट में पहली पुनर्विचार याचिका दाखिल की गई है। जिसमें जमीयत-उलेमा-ए हिंद की ओर से पक्षकार एम सिद्दीकी ने 217 पन्नों की पुनर्विचार याचिका दाखिल की है।  

नई दिल्ली. अयोध्या रामजन्मभूमि विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले के बाद सोमवार को पहली बार पुनर्विचार याचिका दाखिल की गई है। जिसमें जमीयत-उलेमा-ए हिंद की ओर से पक्षकार एम सिद्दीकी ने 217 पन्नों की पुनर्विचार याचिका दाखिल। एम सिद्दीकी की तरफ से मांग की गई कि संविधान पीठ के आदेश पर रोक लगाई जाए, जिसमें कोर्ट ने विवादित जमीन को राम मंदिर के पक्ष दिया था।

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मंदिर के लिए न बनाया जाए ट्रस्ट 

याचिका में ये भी मांग की गई है कि सुप्रीम कोर्ट केंद्र सरकार को आदेश दे कि मंदिर बनाने को लेकर ट्रस्ट का निर्माण न करे। याचिका में कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट ने 1934, 1949 और 1992 में मुस्लिम समुदाय के साथ हुई ना-इंसाफी को गैरकानूनी करार दिया, लेकिन उसे नजरअंदाज भी कर दिया। याचिका में कहा गया कि इस मामले में पूर्ण न्याय तभी होता जब मस्जिद का पुनर्निर्माण होगा। एम सिद्दीकी ने अपनी याचिका में कहा कि विवादित ढांचा हमेशा ही मस्जिद था और उस पर मुसलमानों का एकाधिकार रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने मान लिया कि 1528 से 1856 तक वहां नमाज न पढ़ने के साक्ष्य सही है, जो कि कोर्ट ने गलत किया।

AIMPLB भी दाखिल करेगा याचिका 

सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले के खिलाफ इस मामले में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड भी रिव्यू पिटीशन दायर करेगा। बोर्ड के वकील जफरयाब जिलानी ने कहा कि हम आज सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रिव्यू पिटीशन दायर करने वाले नहीं हैं। हमने पुनर्विचार याचिका तैयार की है और हम इसे 9 दिसंबर से पहले किसी भी दिन दाखिल कर सकते हैं।