JDS नेता एचडी रेवन्ना से जुड़ा यौन उत्पीड़न का मामला बेंगलुरु कोर्ट ने खारिज कर दिया है। कोर्ट ने शिकायत दर्ज कराने में हुई 4 साल की देरी को फैसले का आधार बनाया। CrPC के तहत ऐसे मामलों के लिए 3 साल की समय-सीमा है।

बेंगलुरु: पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा के बेटे और जेडीएस नेता एचडी रेवन्ना से जुड़ा यौन उत्पीड़न का मामला बेंगलुरु की एक अदालत ने खारिज कर दिया है। एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के.एन. शिवकुमार ने यह कहते हुए रेवन्ना को बरी कर दिया कि शिकायत दर्ज कराने में लगभग चार साल की देरी को सही नहीं ठहराया जा सकता। यह फैसला रेवन्ना और उनके बेटे प्रज्वल रेवन्ना के खिलाफ दर्ज मामले में आया है। केस खारिज करने की मांग करते हुए रेवन्ना ने हाईकोर्ट में याचिका दी थी, जिसने निचली अदालत को यह तय करने का निर्देश दिया था कि क्या शिकायत में हुई देरी पर विचार किया जा सकता है।

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आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 468 के मुताबिक, जिन अपराधों में तीन साल तक की सजा हो सकती है, उनमें शिकायत दर्ज कराने के लिए तीन साल की समय-सीमा होती है। लेकिन इस मामले में शिकायत चार साल से भी ज्यादा की देरी से दर्ज की गई। कोर्ट ने पाया कि अभियोजन पक्ष इस देरी की वजह ठीक से नहीं बता पाया। इसलिए, कोर्ट ने साफ किया कि धारा 354ए के तहत रेवन्ना पर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। रेवन्ना और उनके बेटे के खिलाफ यह मामला 28 अप्रैल को हासन जिले के होलेनरसीपुरा पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था।

हजारों अश्लील वीडियो सामने आने के बाद एक पीड़िता की शिकायत पर यह एफआईआर दर्ज की गई थी। रेवन्ना पर यौन उत्पीड़न और अपहरण जैसे गंभीर आरोप थे। उन्हें अपहरण के मामले में पहले ही जमानत मिल चुकी है। वहीं, यौन उत्पीड़न के कई मामलों में आरोपी रेवन्ना के बेटे प्रज्वल रेवन्ना अभी भी जेल में हैं।