कर्नाटक (Karnataka) में मंदिरों (Temple) को सरकार के नियंत्रण से मुक्त करने का मुद्दा गरम हो रहा है। गुरुवार को गृह मंत्री ने इस सबंध में एक बिल लाने का विचार करने की बात कही जिस पर कांग्रेस (Congress) नेता डीके शिवकुमार ने विरोध जताया और कहा कि हम यह नहीं होने देंगे।

बेंगलुरू। कर्नाटक में मंदिरों को सरकार के नियंत्रण से मुक्त करने को लेकर सरकार और विपक्ष आमने सामने आ गया है। गुरुवार को प्रदेश के गृह मंत्री अरागा ज्ञानेंद्र ने कहा कि हम मंदिरों को सरकार के नियंत्रण से मुक्त करने के लिए एक विधेयक लाने पर विचार कर रहे हैं। यह मंदिर में इकट्ठे होने वाले दान के पैसों से मंदिरों के विकास में सहायक होगा। 

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उधर, इस विधेयक को लेकर कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने सरकार पर मंदिरों की संपत्ति संघ परिवार को सौंपने का आरोप लगाया है। उन्होंने गुरुवार को कहा कि कर्नाटक सरकार प्रदेश के सभी संपन्न मंदिरों और संपत्तियों को संघ परिवार को सौंपना चाहती है। वे इसके लिए कानून लाने की कोशिश कर सकते हैं, लेकिन हम ऐसा नहीं होने देंगे। वे सिर्फ हिंदुत्व की बात करते हैं। हम हिंदू हैं और हम इसकी अनुमति नहीं देंगे।

कर्नाटक में उडुपी श्रीकृष्ण मंदिर, महाबलेश्वर मंदिर, मुरुदेश्वरा मंदिर, श्री विरुपाक्षेश्वरा मंदिर समेत श्रीकृष्ण, भगवान शिव, मां दुर्गा और अन्य देवी देवताओं के तमाम प्रसिद्ध मंदिर हैं। विपक्ष का दावा है कि मंदिरों की आय का कोई लेखा-जोखा नहीं रहे, इसलिए सरकार यह विधेयक लाकर मंदिरों का पैसा आरएसएस के हवाले करना चाह रही है।

ट्विटर पर लोग बोले-अभी भी सोच रहे हैं...
गृह मंत्री के इस बयान पर कुछ लोगों ने खुशी जताई, लेकिन विपक्ष नाराज दिखा। ट्विटर पर इस फैसले पर एक यूजर ने कहा - अभी भी सोच रहे हैं। 70 साल से हमारे मंदिर सरकारों के अधीन हैं। इन्हें मुक्त होना ही चाहिए। एक यूजर ने कहा- यह संवैधानिक रूप से सही नहीं है, जिस पर जीवन नाम के एक यूजर ने लिखा -अगर दूसरे धर्म अपने धार्मिक स्थलों का पैसा अपने हिसाब से खर्च कर सकते हैं तो हिंदू क्यों नहीं। ज्यादातर यूजर्स ने इस फैसले पर खुशी जाहिर करते हुए यह बिल जल्दी लाने की बात कही। 

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