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चाचा V/s भतीजा: 'दु:ख इस बात का है, जब बीमार था, तब पीठ पीछे साजिश हुई, कहते तो मैं खुद उन्हें पद दे देता'

राजनीति में मौसम विज्ञानी समझे जाने वाले रामविलास पासवान के निधन के साथ ही लोकजन शक्ति पार्टी(LJP) दो फाड़ हो गई है। चिराग पासवान को पार्टी के अध्यक्ष पद से हटाने के बाद चाचा पशुपति पारस अब खुद कुर्सी पर विराज गए हैं। इस मामले चिराग ने बुधवार को मीडिया से चर्चा की। साथ ही लोकसभा अध्यक्ष को भी पत्र लिखा है।

LJP political crisis, Chirag Paswan will tell his story in front of the media kpa
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Patna, First Published Jun 16, 2021, 9:56 AM IST
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पटना. लोकजनशक्ति पार्टी (LJP) में मचे घमासान के बीच अध्यक्ष पद से हटाए गए चिराग पासवान बुधवार को मीडिया के सामने अपने चाचा पर खूब बरसे। उन्होंने कहा कि मेरे पीठ पीछे कुछ लोगों ने साजिश की है। अभी ये लड़ाई लंबी है। चुनाव में LJP को सफलता मिली, लेकिन इसमें चाचा की कोई भूमिका नहीं है। LJP ने कभी सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। LJP को तोड़ने की पहले भी कोशिश हुई है। मुझसे कहते, मैं खुद उन्हें पद दे देता। चाचा को गलत तरीके से नेता चुना गया। मैंने पार्टी और परिवार को एकजुट रखने की कोशिश की। चाचा से बातचीत की कोशिश की। भविष्य में कानूनी लड़ाई को तैयार हूं।

जब मैं बीमार था, तब मेरी पीठ पीछे साजिश हुई
चिराग ने कहा-दु:ख मुझे इस बात का है कि जब मैं बीमार था, उस समय मेरे पीठ पीछे ये पूरा षड्यंत्र रचा गया। मैंने चुनाव के बाद अपने चाचा से संपर्क करने का, उनसे बात करने का निरंतर प्रयास किया। पार्टी के पूरे समर्थन के साथ मैंने चुनाव लड़ा। कुछ लोग संघर्ष के रास्ते पर चलने के लिए तैयार नहीं थे। मेरे चाचा ने खुद चुनाव प्रचार में कोई भूमिका नहीं निभाई। मेरी पार्टी के कई और सांसद अपने व्यक्तिगत चुनाव में व्यस्त थे। बिहार चुनाव के दौरान, उससे पहले भी, उसके बाद भी कुछ लोगों द्वारा और खास तौर पर जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) द्वारा हमारी पार्टी को तोड़ने का प्रयास निरंतर किया जा रहा था।

लोकसभा अध्यक्ष को लिखा पत्र
इसके साथ ही चिराग ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखा है। इसमें कहा, "पशुपति कुमार पारस को लोकसभा में लोजपा का नेता घोषित करने का निर्णय हमारी पार्टी के संविधान के प्रावधान के विपरीत है।" उन्होंने अध्यक्ष से उनके पक्ष में नया सर्कुलर जारी करने का अनुरोध किया।

रामविलास के निधन के बाद टूट गई पार्टी
बता दें कि रामविलास पासवान के निधन के एक साल बाद ही पार्टी दो फाड़ हो गई है। हैरानी की बात यह है कि रामविलास पासवान को राजनीति में मौसम विज्ञानी माना कहा जाता था। यानी सत्ता का ऊंट किस करवट बैठेगा, वे भांप लेते थे। लेकिन उनके बेटे चिराग अपनी ही पार्टी में मची बगावत को नहीं समझ सके। इस तरह रातों-रात पशुपति पारस ने सांसदों के साथ मिलकर भतीजे चिराग को बाहर का रास्ता दिखा दिया। अंत में पशुपति को ही पार्टी का नेता और संसदीय दल का अध्यक्ष चुन लिया गया। इतना ही नहीं जब चिराग अपने चाचा पशुपति पारस के घर पहुंचे, तो काफी देर तक उन्हें अंदर एंट्री नहीं दी गई। जब वह अंदर पहुंचे तो चाचा बाहर निकल चुके थे। यानि कि चिराग से मुलाकात तक नहीं की।

स्पीकर ने दे दी मान्यता
चिराग की जगह पशुपतिनाथ पासवान को LJP के नए अध्यक्ष की स्पीकर ओम बिरला (Om Birla) ने मान्यता दे दी है। पार्टी सांसदों ने महबूब अली कैसर को उपनेता चुना है। वहीं, चंदन सिंह को पार्टी का मुख्य सचेतक बनाया गया है। बता दें कि पार्टी के 6 में से 5 सांसदों ने सांसद चिराग पासवान के खिलाफ बगावत कर दी थी। इनमें पशुपति कुमार पारस, चंदन सिंह, प्रिंस राज, वीणा देवी और महबूब अली कैसर शामिल हैं।

फेल हुआ चिराग का इमोशनल कार्ड
दरअसल, सांसदों के पार्टी से बगाबत करने के बाद चिराग पासवान ने सोमवार सुबह इमोशनल कार्ड खेला था, लेकिन वह भी उनका फेल हो गया। चिराग अपनी मां रीना पासवान के साथ चाचा से मिलने के लिए उनके घर पहुंचे हुए थे। वह राष्ट्रीय अध्यक्ष पद छोड़ने को तैयार तक हो गए थे, लेकिन उन्हें अंदर जाने की अनुमति तक नहीं दी गई। चिराग करीब डेढ़ घंटे तक पशुपति पारस के बाहर खड़े रहे, लेकिन चाचा ने उनसे कोई मुलाकात नहीं की। बताया जाता है कि चिराग ने चाचा को मनाने के लिए मां को आगे किया, लेकिन बात नहीं बन पाई। 

कौन हैं भतीजे चिराग का तख्‍ता पलटने वाले चाचा पशुपति
बता दें कि पशुपति पारस राम विलास पासवान के तीसरे नंबर के भाई और चिराग पासवान के चाचा हैं। वह बिहार में हाजीपुर लोकसभा क्षेत्र से एलजेपी के सांसद हैं। बताया जाता है कि एलजेपी में इस तरह के बदलाव की पूरी पटकथा खुद पशुपति ने लिखी थी। उन्होंने पूरे प्लान के साथ यह फैसला लिया है। यह कोई अचानक नहीं लिया गया है। इसके लिए पिछले कुछ दिनों से मंथन जारी था। लेकिन पार्टी के पांच सांसदों के साथ रविवार शाम हुई बैठक में इस पर फाइनल मुहर लगा दी गई।

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