नई दिल्ली.  पाकिस्तान से राजस्थान के रास्ते देश में घुसे टिड्डी दल ने मुसीबतें बढ़ा दी है। देश के 9 राज्यों में टिड्डियों का खतरा है। इनमें राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, मध्यप्रदेश, गुजरात, छत्तीसगढ़ जैसे राज्य शामिल हैं। मौजूदा समय में टिड्डियों का दल राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश में 50 हजार हेक्टेयर से ज्यादा की फसल खराब कर दिया है। उत्तर प्रदेश के भी कुछ हिस्सों में टिड्डी दल पहुंच गया है। और दिल्ली की तरफ भी आ सकता है। ऐसा इसलिए भी क्योंकि टिड्डियों का झुंड हवा की दिशा में उड़ता है।

उत्तर प्रदेश के 13 जिलों में अलर्ट 

टिड्डियों का दल बुधवार को उत्तर प्रदेश के झांसी पहुंच गया। यह दल लगभग एक किमी क्षेत्र में फैला हुआ है। टिड्डियों को भगाने के लिए कीटनाशक दवा का छिड़काव किया जा रहा है। इसके  साथ ही वाहनों पर डीजे लगाकर शोर किया जा रहा है। उधर, ललितपुर, आगरा, मथुरा, कानपुर, प्रयागराज समेत पूर्वांचल के जिलों में अलर्ट जारी कर दिया है। 

राजस्थान में ड्रोन से कीटनाशक का छिड़काव

पाकिस्तान के रास्ते राजस्थान में प्रवेश किए टिड्डियों के दल को रोकने के लिए ड्रोन से कीटनाशक दवाओं का छिड़काव किया जा रहा है। इतना ही नहीं 89 फायर बिग्रेड से भी छिड़काव किया जा रहा है। पाकिस्तान से 11 अप्रैल को भारत में घुसे टिड्डियों का दल राज्य के 6 जिलों में कहर मचा रहा है। 

मध्यप्रदेश में टिड्डी अटैक 

राजस्थान से आगे बढ़कर मध्यप्रदेश पहुंचा। यहां सीहोर, मंदसौर, नीमच, रतलाम, खंडवा में तबाही मचाने के बाद दमोह, कटनी पहुंचा। इस दौरान दमोह के 50 गांवों में टिड्डों के दल ने भारी नुकसान पहुंचाया है। इस दौरान लोगों ने डीजे, ध्वनी विस्तारक यंत्रों के तेज आवाज और कीटनाशक के छिड़काव से भगाया गया। जिसके बाद प्रदेश के कई जिलों में अलर्ट जारी किया गया है। 

एक दिन में 150 किमी तक उड़ सकती है टिड्डी

एक्सपर्ट का मानना है कि अगर हवा दिल्ली की तरफ चली तो अगले कुछ दिनों में टिड्डियां दिल्ली पहुंच जाएंगी। अगर दिल्ली में टिड्डियों का हमला होता है, तो ये बहुत खतरनाक भी होगा, क्योंकि यहां का ग्रीन कवर 22% है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, एक टिड्डी दिनभर में 100 से 150 किमी तक उड़ सकती और 20 से 25 मिनट में ही पूरी फसल बर्बाद कर सकती है। इन्हीं सब कारणों से इसे 27 साल बाद सबसे बड़ा टिड्डी हमला माना जा रहा है।

2 ग्राम की होती है एक टिड्डी 

टिड्डी का वजन महज 2 ग्राम है। टिड्डियां इतना खाती भी इतना ही है। लेकिन, जब यही टिड्डी लाखों-करोड़ों की तादाद में झुंड बनाकर हमला कर दे, तो चंद मिनटों में ही पूरी की पूरी फसल बर्बाद कर सकती है। फसलों को बर्बाद करने वाली टिड्डों की ये प्रजाति रेगिस्तानी होती है, जो सुनसान इलाकों में पाई जाती है। टिड्डे एक दिन में 35 हजार लोग जितना खाना खाते हैं। 

1812 से टिड्डों का हमला झेलते आ रहा है भारत 

केंद्रीय कृषि मंत्रालय के अधीन आने वाले डायरेक्टोरेट ऑफ प्लांट प्रोटेक्शन, क्वारैंटाइन एंड स्टोरेज के मुताबिक, 1812 से भारत टिड्डियों के हमले झेलते आ रहा है। 1926 से 31 के दौरान टिड्डियों के हमले में 10 करोड़ रुपए की फसल बर्बाद हुई थी। इसके बाद 1940 से 1946 और 1949 से 1955 के बीच भी टिड्डियों का हमला हुआ। इसमें दोनों बार 2-2 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था। 1959 से 1962 के बीच टिड्डी दल ने 50 लाख रुपए की फसल तबाह की।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 1962 के बाद टिड्डियों का कोई ऐसा हमला नहीं हुआ, जो लगातार तीन-चार साल तक चला। लेकिन, 1978 में 167 और 1993 में 172 झुंड ने हमला कर दिया था। इसमें 1978 में 2 लाख रुपए और 1993 में 7.18 लाख रुपए की फसल बर्बाद हो गई थी। 1993 के बाद भी 1998, 2002, 2005, 2007 और 2010 में भी टिड्डियों के हमले हुए थे, लेकिन ये बहुत छोटे थे।

150 किमी की रफ्तार से उड़ सकते हैं टिड्डे 

यूनाइटेड नेशन के अंतर्गत आने वाले फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गनाइजेशन (एफएओ) के मुताबिक, रेतीले इलाकों में पाई जाने वाली टिड्डियां सबसे खतरनाक होती हैं। ये 150 किमी की रफ्तार से उड़ सकती हैं। एक किमी के दायरे में फैले झुंड में 15 करोड़ से ज्यादा टिड्डियां हो सकती हैं। इन टिड्डियों का 1 किमी के दायरे में फैला झुंड एक दिन में 35 हजार लोगों का खाना चट कर जाती हैं।

टिड्डियों का एक झुंड 1 किमी के दायरे से लेकर सैकड़ों किमी के दायरे तक फैला हुआ हो सकता है। यूएन की फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गनाइजेशन के मुताबिक, टिड्डियों के झुंड में 15 करोड़ से ज्यादा टिड्डे-टिड्डियां हो सकती हैं।