एंटीलिया केस का मामला महाराष्ट्र सरकार तक पहुंच चुका है। पूर्व सीएम और भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस ने कहा, पवार साहब को सही ब्रीफिंग नहीं दी गई थी, एक राष्ट्रीय नेता के मुंह से गलत बातें कहलवाई गईं। 15 से 27 फरवरी के बीच गृह मंत्री जो होम क्वारंटीन थे, वो आइसोलेशन में नहीं थे। कई लोग उनसे मिले हैं।

मुंबई. एंटीलिया केस का मामला महाराष्ट्र सरकार तक पहुंच चुका है। पूर्व सीएम और भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस ने कहा, पवार साहब को सही ब्रीफिंग नहीं दी गई थी, एक राष्ट्रीय नेता के मुंह से गलत बातें कहलवाई गईं। 15 से 27 फरवरी के बीच गृह मंत्री जो होम क्वारंटीन थे, वो आइसोलेशन में नहीं थे। कई लोग उनसे मिले हैं।

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एंटीलिया केस के दौरान रश्मि शुक्ला की एंट्री
दरअसल, अपने तबादले को लेकर परमबीर सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई है, जिसमें अपने ही बैच की आईपीएस अधिकारी रश्मि शुक्‍ला का जिक्र किया है। रश्मि शुक्‍ला ने कुछ कॉल रिकॉर्डिंग्‍स की थी, जिसके आधार पर देशमुख के खिलाफ भ्रष्‍टाचार के आरोप लगाए हैं।

कौन और कहां हैं IPS रश्मि शुक्ला?
रश्मि शुक्ला अभी सीआरपीएफ में एडीजी (एडिशनल डायरेक्‍टर जनरल) हैं। इससे पहले वे डीजी (सिविल डिफेंस) थीं। स्टेट इंटेलिजेंस डिपार्टमेंट (SID) की कमिश्‍नर होने के दौरान उन्‍होंने अनिल देशमुख को लेकर शिकायत की थी। उसी दौरान उन्होंने कुछ कॉल रिकॉर्डिंग की थी।

रश्मि शुक्ला ने 25 अगस्त 2020 को उस समय के पुलिस महानिदेशक (DGP) को पत्र लिखा था। 

रश्मि शुक्ला की रिपोर्ट पर एक्शन नहीं 
देवेंद्र फडणवीस ने दावा किया कि राज्य में महा विकास आगाड़ी (एमवीए) सरकार ने पुलिस विभाग में ट्रांसफर और पोस्टिंग में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की ऑडियो इंटरसेप्ट वाली राज्य की खुफिया विभाग की रिपोर्ट पर कार्रवाई नहीं की।

6.3 जीबी डेटा में रिकॉर्डिंग : फडणवीस 
फडणवीस ने कहा कि तत्कालीन कमिश्नर इंटेलिजेंस रश्मि शुक्ला के पास 6.3 जीबी डेटा की कॉल रिकॉर्डिंग थी, जिसमें कई प्रमुख पुलिस अधिकारियों के नामों पर चर्चा की गई थी।

"सीएम भ्रष्टाचार के बारे में जानते थे"
भाजपा नेता ने कहा कि इन सभी फोन कॉल को राज्य सरकार से अनुमति के बाद दर्ज किया गया था, लेकिन अगस्त 2020 में मुख्यमंत्री (उद्धव ठाकरे) को रिपोर्ट सौंपने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने कहा, मैं इस मामले में सीबीआई जांच की मांग कर रहा हूं। देवेंद्र फडणवीस ने यह भी दावा किया कि महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे पुलिस विभाग में चल रहे भ्रष्टाचार और जबरन वसूली के बारे में जानते थे।