बेंगलुरु में किसान नेता राकेश टिकैत (Rakesh Tikait) पर स्याही फेंकने के मामले के एक आरोपी को हत्या का दोषी करार दिया गया था। वह 2015 में जेल से रिहा हुआ था। तीनों आरोपी पत्रकार बनकर टिकैत के प्रेस कॉन्फ्रेंस में गए थे।

बेंगलुरु। किसान नेता राकेश टिकैत (Rakesh Tikait) को काली स्याही से नहलाने वाला व्यक्ति इंसानी खून भी बहा चुका है। हत्या के मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद उसे जेल भेज दिया गया था। अच्छा बर्ताव करने के चलते उसे जेल से बाहर आने का मौका मिला था। 

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घटना 30 मई को घटी थी। बेंगलुरु में एक कार्यक्रम के दौरान उग्र लोगों ने राकेश टिकैत पर हमला कर दिया था। उनपर काली स्याही फेंकी गई थी। इस घटना के आरोपियों में से एक हत्या के मामले में दोषी करार दिया गया व्यक्ति है। बेंगलुरु पुलिस ने बुधवार को यह जानकारी दी। पुलिस अधिकारी ने कहा कि अच्छा बर्ताव करने के चलते दोषी को जेल से छोड़ दिया गया था। 

2015 में जेल से हुआ था रिहा
पुलिस उपायुक्त (अपराध) शरणप्पा एस डी ने बताया कि राकेश टिकैत पर स्याही फेंकने वाले आरोपी का नाम शिवकुमार अत्री (52) है। वह हत्या के मामले में दोषी है। 2015 में हासन जेल से उसे रिहा किया गया था। टिकैत पर हुए हमले की जांच की जा रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि आरोपियों को हमला करने के लिए किसने उकसाया था। 

पत्रकार बनकर गांधी भवन घुसे थे आरोपी
टिकैत पर हमले के मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को हिरासत में लिया है। 30 मई को टिकैत गांधी भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे। इसी दौरान तीनों आरोपी पत्रकार बनकर अंदर पहुंचे थे। माइक्रोफोन ठीक करने के बहाने उनमें से एक मंच पर चढ़ गया और माइक से टिकैत पर हमला कर दिया, जबकि दूसरे व्यक्ति ने उस पर स्याही फेंक दी। बाद में आरोपियों ने पुलिस की गिरफ्त में आने से पहले 'मोदी, मोदी' के नारे लगाए।

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टिकैत ने खुद पर हुए हमले को राज्य सरकार की मिलीभगत बताया था। उन्होंने कहा था कि उनके हत्या की कोशिश की गई। दूसरी कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि इस घटना के पीछे भाजपा है। इस पर राज्य के गृह मंत्री अरागा ज्ञानेंद्र ने कहा था कि इसमें शामिल लोगों का सत्ताधारी पार्टी से कोई नाता नहीं है।

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