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रंगदारी मामले में Mumbai Police के पूर्व कमिश्नर Parambir Singh से हुई पूछताछ, बोले-कोर्ट पर पूरा भरोसा

सिंह पर महाराष्ट्र में जबरन वसूली के कम से कम चार मामले हैं। एजेंसियों ने जब उनसे पूछताछ को बुलाया तो वह अंडरग्राउंड हो गए थे। अक्टूबर से लापता थे, जिससे अफवाहें उड़ीं कि वह देश छोड़कर भाग गए हैं। 

Mumbai Crime branch interrogated his ex Boss Parambir Singh in extortion case, came in limelight after allegation on Anil Deshmukh for 100 crore rupees illegal collection, DVG
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Mumbai, First Published Nov 25, 2021, 9:22 PM IST
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मुंबई। रंगदारी (extortion) के मामलों में गुरुवार को मुंबई पुलिस (Mumbai Police) के पूर्व आयुक्त (Ex Police Commissioner) परमबीर सिंह (Parambir Singh) पेश हुए। मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच के समक्ष पेश होने के बाद परमबीर सिंह ने कहा कि वह जांच में सहयोग कर रहे हैं और उन्हें अदालत पर पूरा भरोसा है। सिंह ने कहा, "सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार मैं आज जांच में शामिल हुआ हूं। मैं जांच में सहयोग कर रहा हूं और मुझे अदालत पर पूरा भरोसा है।"

चार से अधिक मामले परमबीर सिंह पर जबरन वसूली के

सिंह पर महाराष्ट्र में जबरन वसूली के कम से कम चार मामले हैं। एजेंसियों ने जब उनसे पूछताछ को बुलाया तो वह अंडरग्राउंड हो गए थे। अक्टूबर से लापता थे, जिससे अफवाहें उड़ीं कि वह देश छोड़कर भाग गए हैं। उनके वकील ने कहा कि पूर्व पुलिस आयुक्त ने अपराध शाखा के समक्ष अपने बयान दिए हैं और जांच में सहयोग करना जारी रखेंगे।

गुरुवार को परमबीर सिंह क्राइम ब्रांच के सामने हुए पेश

हालांकि, पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह गुरुवार सुबह करीब 11 बजे मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच पहुंचे। इन्वेस्टिगेटिंग टीम ने देर शाम तक उनसे पूछताछ की है। दरअसल, परमबीर सिंह अक्टूबर महीने से ही गायब थे। वह एजेंसियों के सामने तब आए जब सुप्रीम कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी नहीं किए जाने की बात कही। सुप्रीम कोर्ट ने बीते दिनों सुनवाई के दौरान परमबीर सिंह की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। 

मई से ही काम पर नहीं लौटे हैं परमबीर सिंह

परमबीर सिंह ने मई के बाद से काम करने की सूचना नहीं दी है। यह उस समय की बात है जब उनको शासन ने मुंबई पुलिस आयुक्त पद से ट्रांसफर कर दिया था। यह तबादला मुंबई पुलिस अधिकारी सचिन वझे की गिरफ्तारी के बाद हुई। वझे, प्रसिद्ध उद्योगपति मुकेश अंबानी के एंटीलिया विस्फोटक प्रकरण का संदिग्ध था। उसे विस्फोट से डराने के मामले (अंबानी के घर के पास विस्फोटकों से भरी एक एसयूवी मिली) और बाद में व्यवसायी मनसुख हिरन की संदिग्ध मौत के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। वझे, परम बीर सिंह के करीबी के रूप में जाना जाता है। केवल एक सहायक पुलिस निरीक्षक होने के बावजूद उनकी सीधी पहुंच पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह तक थी। सिंह को मार्च में स्थानांतरित कर दिया गया था। 

गिरफ्तारी के बाद देशमुख पर लगाए आरोप

पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह, अपने ट्रांसफर के बाद महाराष्ट्र के तत्कालीन गृह मंत्री अनिल देशमुख पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने पुलिस को 100 करोड़ रुपये वसूली के टारगेट का भी आरोप लगाया था। इन आरोपों के बाद मामला तूल पकड़ लिया। अनिल देशमुख को इस्तीफा देना पड़ा था। भ्रष्टाचार का आरोप लगने के बाद सीबीआई ने जांच शुरू कर दी। इसके बाद ईडी ने भी मामला दर्ज कर लिया। फिलहाल, अनिल देशमुख ईडी की हिरासत में हैं।

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