सिंहस्थ कुंभ मेला 2027 की तैयारियों पर अहम बैठक हुई। इसमें नासिक-त्र्यंबकेश्वर को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा दिलाने, दावोस में अंतरराष्ट्रीय प्रचार और 'हर घर कुंभ' जैसे अभियानों पर चर्चा की गई।
नासिक (महाराष्ट्र) [भारत], 4 अगस्त (एएनआई): सिंहस्थ कुंभ मेला 2027 को लेकर सोमवार को एक अहम समीक्षा बैठक हुई। नासिक-त्र्यंबकेश्वर कुंभ मेला प्राधिकरण (एनटीकेएमए) के मुख्यालय में हुई इस बैठक की अध्यक्षता मराठी भाषा और सांस्कृतिक मामलों के विभाग के सचिव डॉ. किरण कुलकर्णी ने की। बैठक में दावोस 2027 के जरिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचार, नासिक और त्र्यंबकेश्वर के विरासत क्षेत्रों को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा दिलाने की संभावना और कुंभ मेले के लिए कई सांस्कृतिक पहलों जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई।
इस बैठक में एनटीकेएमए के कमिश्नर शेखर सिंह, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के वरिष्ठ अधिकारियों और अन्य संबंधित अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक में सिंहस्थ कुंभ मेला 2027 की पहचान और वैश्विक दृश्यता को मजबूत करने के उद्देश्य से कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर विचार-विमर्श किया गया।
कुंभ 2027 के लिए सांस्कृतिक और वैश्विक पहल
चर्चा किए गए प्रस्तावों में दावोस 2027 के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय पहुंच, 'हर घर कुंभ' अभियान, महाराष्ट्र आध्यात्मिक विचार नेतृत्व कार्यक्रम, आध्यात्मिक और ज्ञान सम्मेलन, और कुंभ मेले के इतिहास, परंपराओं और आध्यात्मिक महत्व को प्रदर्शित करने के लिए एक विश्व स्तरीय सिंहस्थ व्याख्या और अनुभव केंद्र की स्थापना शामिल थी।
बैठक में नासिक और त्र्यंबकेश्वर के विरासत क्षेत्रों के लिए यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल की मान्यता प्राप्त करने की प्रक्रिया शुरू करने पर भी चर्चा हुई। इसके अलावा, दक्षिण क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (एसजेडसीसी) और पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (डब्ल्यूजेडसीसी) के सहयोग से महाराष्ट्र के पारंपरिक हस्तशिल्प, लोक और जनजातीय कलाओं और सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने के लिए एक 'कलाग्राम' विकसित करने पर भी विचार किया गया।
नासिक में प्रस्तावित गोदावरी पंडाल और त्र्यंबकेश्वर में अहिल्या पंडाल के लिए सांस्कृतिक प्रोग्रामिंग और क्यूरेशन भी चर्चाओं में प्रमुखता से शामिल रहे।
विरासत स्थलों पर संरक्षण कार्यों की समीक्षा
बैठक में सिंहस्थ कुंभ मेला 2027 से पहले नासिक और त्र्यंबकेश्वर के प्रमुख विरासत स्थलों पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा किए जा रहे संरक्षण, जीर्णोद्धार और विकास कार्यों की प्रगति की भी समीक्षा की गई। इनमें संगम तीर्थ और पुराना कुशावर्त, नरोशंकर मंदिर, काशी विश्वेश्वर मंदिर, गौतमेश्वर मंदिर, मुकुंदेश्वर मंदिर और टैंक, प्रयाग तीर्थ, बिल्व टैंक और मंदिर, चखोबा मंदिर, सुंदरनारायण मंदिर और घाट, इंद्र कुंड, बालाजी कोट की दीवार, गौतम तालाब, अजगरेश्वर समाधि, टलकुटेश्वर और मोदकेश्वर मंदिर, और त्र्यंबकेश्वर में कुशावर्त कुंड और उसके आसपास (चरण II और III) शामिल हैं।
समय पर काम पूरा करने के निर्देश
इन परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए डॉ. कुलकर्णी ने गुणवत्ता से समझौता किए बिना सभी चल रहे कार्यों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने संबंधित एजेंसियों को समन्वय मजबूत करने, कार्यान्वयन में आने वाली बाधाओं को शीघ्रता से दूर करने और यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि सभी संरक्षण कार्य सिंहस्थ कुंभ मेला 2027 से काफी पहले पूरे हो जाएं। (एएनआई)
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