दिल्ली हाईकोर्ट ने सेना के दो मेडिकल अफसरों को NEET PG 2026 परीक्षा में बैठने की अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि नए नियमों को चुनौती लंबित रहने के दौरान राहत देना उचित नहीं है। याचिकाकर्ताओं ने नए ट्रेनिंग नियमों को चुनौती दी थी।

HC ने अंतरिम राहत देने से किया इनकार

नई दिल्ली [भारत], 30 जून (एएनआई): दिल्ली हाईकोर्ट ने सेना चिकित्सा कोर (Army Medical Corps) के दो अधिकारियों को NEET PG 2026 परीक्षा के लिए आवेदन करने और उसमें शामिल होने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि ऐसी राहत देना सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं के 2025 के प्रशिक्षण नियमों के संचालन को प्रभावी ढंग से निलंबित कर देगा, जबकि उन नियमों को चुनौती अभी भी सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (AFT) के समक्ष लंबित है।

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न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा और न्यायमूर्ति विनोद कुमार की अवकाशकालीन पीठ ने AFT के उन आदेशों को चुनौती देने वाली अलग-अलग रिट याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिसमें उन्हें अंतरिम राहत देने से इनकार किया गया था। हाईकोर्ट ने माना कि उसे AFT के आदेशों में कोई त्रुटि नहीं मिली और लंबित आवेदनों के साथ याचिकाओं को खारिज कर दिया।

क्या है पूरा मामला?

याचिकाकर्ताओं ने सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं के चिकित्सा/गैर-तकनीकी अधिकारियों के लिए 2025 के प्रशिक्षण और व्यावसायिक प्रगति नियमों की वैधता को चुनौती दी थी, जिसके तहत शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) अधिकारियों के लिए स्नातकोत्तर चिकित्सा पाठ्यक्रमों के लिए आवेदन करने की पात्रता अवधि 4-10 साल की सेवा से घटाकर 4-7 साल कर दी गई थी।

उन्होंने तर्क दिया कि पहले के 2018 के प्रशिक्षण नियमों के तहत, वे 10 साल की सेवा पूरी होने तक NEET PG के लिए उपस्थित होने के हकदार थे और 30 जून की समय सीमा से पहले अपने आवेदन जमा करने की अनुमति मांगी थी।

अदालत की अहम टिप्पणियां

याचिकाओं का विरोध करते हुए, केंद्र सरकार ने तर्क दिया कि 2025 के नियम नवंबर 2025 में अधिसूचित किए गए थे और पहले से ही लागू थे। यह भी प्रस्तुत किया गया कि यदि याचिकाकर्ता अंततः AFT के समक्ष अपनी चुनौती में सफल हो भी जाते हैं, तो भी वे पहले के नियमों के तहत 2028 तक परीक्षा में बैठने के पात्र होंगे।

हाईकोर्ट ने पाया कि दोनों अधिकारी क्रमशः 2017 और 2018 में सेवा में शामिल हुए थे और चार साल की सेवा पूरी करने के बाद NEET PG में शामिल होने के योग्य हो गए थे। कोर्ट ने कहा कि उनके पास 2022 और 2023 से परीक्षा देने के अवसर थे।

पीठ ने आगे कहा कि AFT पहले ही यह दर्ज कर चुका है कि याचिकाकर्ताओं ने या तो पहले आवेदन नहीं करने का विकल्प चुना था या वे परीक्षा प्रक्रिया में प्रवेश पाने में असफल रहे थे। यह ट्रिब्यूनल के इस निष्कर्ष से सहमत था कि केवल नीति को चुनौती देना अंतरिम राहत के लिए प्रथम दृष्टया मामला स्थापित नहीं करता है।

कोर्ट ने माना कि चूंकि 2025 के प्रशिक्षण नियम वर्तमान में लागू हैं, इसलिए मांगी गई राहत देने से उनके संचालन पर प्रभावी रूप से रोक लग जाएगी, भले ही ट्रिब्यूनल इस चुनौती पर अंतिम फैसला न कर दे, जो उचित नहीं होगा।

पीठ ने यह भी ध्यान में रखा कि यह मामला पहले से ही 28 अगस्त, 2026 को AFT के समक्ष सूचीबद्ध है, और देखा कि यदि याचिकाकर्ता अंततः अपनी चुनौती में सफल होते हैं, तो भी उनके पास पहले की व्यवस्था के तहत 2028 तक NEET PG परीक्षा में बैठने का समय होगा। रिट याचिकाओं में कोई योग्यता न पाते हुए, हाईकोर्ट ने उन्हें खारिज कर दिया। (एएनआई)

(Except for the headline, this story has not been edited by Asianetnews Editorial staff and is published from a syndicated feed.)