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भारत के आखिरी चीतों का शिकार करने वाले राजा की पोती बोलीं- मस्ती के लिए कभी नहीं मारा

भारत के आखिरी तीन चीतों का शिकार करने वाले राजा रामानुज प्रताप सिंह देव की पोती अंबिका सिंह देव ने कहा कि कभी भी जानवरों को मजे के लिए नहीं मारा गया। आदमखोर होने पर उनका शिकार किया जाता था। 
 

Never killed for fun Granddaughter of king accused of hunting India last cheetahs vva
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First Published Sep 18, 2022, 7:03 AM IST

नई दिल्ली। भारत से विलुप्त होने के 70 साल बाद चीते भारतीय धरती पर वापस आ गए हैं। मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क (kuno national park) में शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीतों को छोड़ा और इसे "ऐतिहासिक दिन" करार दिया। 1947 में भारत के अंतिम तीन चीतों का शिकार छत्तीसगढ़ के कोरिया रियासत के राजा रामानुज प्रताप सिंह देव ने किया था। रामानुज प्रताप सिंह की पोती और कांग्रेस विधायक अंबिका सिंह देव ने कहा है कि उनके दादा ने कभी मस्ती के लिए चीतों को नहीं मारा।

अंबिका का जन्म 1968 में हुआ था, जबकि उनके दादा का 1958 में निधन हो गया था। उन्होंने बचपन से ही दादा के कई किस्से सुनाए गए। अंबिका अपने पूर्वजों के शिकार अभियानों की कहानियों सहित कई किंवदंतियों के साथ बड़ी हुईं। अंबिका ने बताया कि 1940 में एक बार जब मेरे दादा राज्य से दूर थे तब एक आदमखोर बाघ ने ग्रामीणों के लिए आतंक पैदा कर दिया था। मेरे पिता महेंद्र प्रताप सिंह ने उसका शिकारी किया था। उस समय वह बमुश्किल 12 साल के थे। मीडिया और फिल्मों में शिकार अभियानों को जिस तरह से दिखाया जाता है यह उसके विपरीत था। जंगली जानवरों का शिकार हमेशा मनोरंजन के लिए नहीं किया गया।

मजे के लिए नहीं हुई जानवरों की हत्या
अंबिका ने कहा कि शाही परिवार द्वारा केवल आदमखोर जानवरों का शिकार किया जाता था। उनके साथ ब्रिटिश अधिकारी भी तैनात होते थे। कई बार ग्रामीण आदमखोर जानवरों से छुटकारा पाने के लिए हमसे संपर्क करते थे। कल्पना कीजिए, उन दिनों घने जंगल क्षेत्रों में इतने सारे जंगली जानवरों के साथ जीवित रहना कितना मुश्किल था। कभी भी बिना जरूरत के किसी जानवर की हत्या नहीं हुई। मजे के लिए जानवरों की हत्या का खेल नहीं खेला गया। 

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घने जंगल में कैसे रहेंगे चीते
कांग्रेस विधायक ने कहा कि उनके दादा ने 1920 के दशक में दूर-दराज के इलाकों में टेलीफोन लाइनें स्थापित की थी ताकि ग्रामीण प्रशासन के अधिकारियों को जानवरों के हमलों के बारे में बता सकें। हमारे इलाके में घने जंगल हैं। मेरे दादाजी ने उन क्षेत्रों में टेलीफोन बूथ स्थापित किए थे जहां आज मोबाइल सिग्नल नहीं मिलता। कूनो नेशनल पार्क में चीतों के पुनर्वास के बारे में अंबिका ने कहा कि यह अच्छी परियोजना है। इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। अफ्रीका के चीते घास के मैदानों के लिए अधिक अनुकूल हैं। वे यहां के घने वन क्षेत्रों में कैसे रहेंगे यह चुनौती है।

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