यमुना फ्लडप्लेन में अवैध डेयरियों पर NGT ने सख्त रुख अपनाया है। निर्देशों का पालन न होने और निरीक्षण में मवेशियों के अस्थायी शेल्टर मिलने के बाद, ट्रिब्यूनल ने MCD को 6 हफ्तों में एक्शन टेकन रिपोर्ट और DPCC को नई रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है।
नई दिल्ली [भारत], 18 जुलाई (एएनआई): नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने कहा है कि दिल्ली में यमुना फ्लडप्लेन से अवैध डेयरी गतिविधियों को हटाने के उसके पहले के निर्देशों का पूरी तरह से पालन नहीं किया गया है।
यह देखते हुए कि हालिया निरीक्षणों के दौरान मवेशियों के अस्थायी शेल्टर और जानवर अभी भी पाए गए, ट्रिब्यूनल ने दिल्ली नगर निगम (MCD) को छह सप्ताह के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। इसने दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) को भी एक नया मूल्यांकन करने और इसी अवधि के भीतर एक नई रिपोर्ट सौंपने को कहा है।
अवैध डेयरियों पर NGT का आदेश
यह आदेश NGT अध्यक्ष जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव की अध्यक्षता वाली एक बेंच ने यमुना फ्लडप्लेन पर चल रहे अवैध डेयरी फार्मों पर ट्रिब्यूनल के 19 अप्रैल, 2024 के आदेश का पालन कराने की मांग वाली एक याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया।
ट्रिब्यूनल ने पाया कि DPCC की 15 जून और 2 जुलाई, 2026 की निरीक्षण रिपोर्ट से पता चला है कि हालांकि कोई स्थायी डेयरी संरचना नहीं मिली, लेकिन बाढ़ क्षेत्र में अस्थायी मवेशी शेल्टर, चारा, गोबर के ढेर और लगभग 50-60 मवेशी मौजूद थे। ट्रिब्यूनल ने कहा कि इन निष्कर्षों से पता चलता है कि उसके पहले के निर्देशों का पालन नहीं किया गया था।
निरीक्षण में क्या मिला?
निरीक्षण में मयूर विहार फेज-I के पास ओ-जोन, डीएनडी फ्लाईओवर के नीचे और न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी के पास के क्षेत्र शामिल थे। DPCC अधिकारियों ने कई जगहों पर मवेशियों के लिए अस्थायी शेल्टर और बाढ़ के मैदानों में चरते हुए आवारा मवेशी पाए। निरीक्षण के दौरान कोई मालिक या अधिकृत प्रतिनिधि मौजूद नहीं था।
DPCC ने ट्रिब्यूनल को यह भी सूचित किया कि उसने दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) को पत्र लिखकर बाढ़ के मैदानी इलाकों से अवैध अतिक्रमण और आवारा जानवरों को हटाने के लिए कहा था।
DDA और MCD की दलीलें
DDA ने ट्रिब्यूनल को सूचित किया कि उसने अनधिकृत डेयरियों के खिलाफ विध्वंस अभियान चलाया था। हालांकि, उसने कहा कि अतिक्रमण हटाने के बाद मवेशी मालिक जानवरों को वापस ला रहे हैं या उन्हें पास के फ्लाईओवर के नीचे रख रहे हैं। DDA के अनुसार, MCD के पशुपालन विभाग को ऐसे मवेशियों को पकड़ना चाहिए।
ट्रिब्यूनल ने आगे कहा कि यदि डेयरी फार्मों के स्थान पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दिशानिर्देशों का उल्लंघन करके मवेशियों को रखा जा रहा है, तो DPCC को उचित कार्रवाई करनी चाहिए, जिसमें आवश्यक हो वहां उल्लंघन करने वालों पर पर्यावरणीय मुआवजा लगाना भी शामिल है।
NGT ने MCD को छह सप्ताह के भीतर अपनी एक्शन टेकन रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया है। इसने DPCC से ट्रिब्यूनल की टिप्पणियों पर विचार करने के बाद एक नई रिपोर्ट दाखिल करने के लिए भी कहा है। मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर, 2026 को होगी। (एएनआई)
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