नई दिल्ली. निर्भया (Nirbhaya) के दोषियों को फांसी देने की नई तारीख तय होने पर वकील एपी सिंह (AP Singh) कोर्ट के बाहर भड़क गए। उन्होंने आरोप लगाया कि कोर्ट के अंदर उन्हें धमकी दी गई। ऐसे में Asianet News ने एपी सिंह से बात की। बातचीत में एपी सिंह ने जज पर ही सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने कहा कि कोर्ट के अंदर मुझे धमकी दी जाती है कि आप आग से खेल रहे हैं। सोच लीजिए। इसके क्या दुष्परिणाम होंगे? अरे मैं जानता हूं क्या होगा? जो जज डेथ वॉरंट जारी करेंगे, सबको प्रमोशन दिया जाएगा।

दोषियों को सजा देने वाले जज पर भी साधा निशाना

एपी सिंह (AP Singh) ने दोषियों को मौत की सजा देने वाले जज योगेश खन्ना पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जिन्होंने सजा दी थी। उनके प्रमोशन हुए आउट ऑफ टर्न। और क्या होगा। आप हमें बता रहे हो। लड्डू आप खा रहे हो और हमें चेतावनी दे रहे हैं। एपी सिंह ने कहा, दोषियों को कितनी बार फांसी दोगे। पहले भी तीन बार फांसी दे चुके हैं। ये आतंकवादी नहीं हैं। पढ़े लिखे हैं। जेल में सुधर रहे हैं। बदल रहे हैं। आपकी चीखें बता रही हैं कि कितना प्रेशर है।

"क्या हार में क्या जीत में, किंचित नहीं भयभीत मैं"

एपी सिंह (AP Singh) ने कहा, क्या हार में क्या जीत में, किंचित नहीं भयभीत मैं। संघर्ष पथ पर जो मिले यह भी सही वह भी सही। उन्होंने कहा कि हम अपने सभी कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल करेंगे। अक्षय की दया याचिका पर किसी ने कुछ नहीं बोला। कोर्ट ने जेल को झाड़ा। लेकिन कुछ नहीं हुआ।

"ऐसे ही नहीं जाने दूंगा"

एपी सिंह (AP Singh) ने कहा, मैं अभी इसपर आगे तक जाऊंगा। ऐसे नहीं जाने दूंगा। देश के संविधान को कलंकित नहीं होने दूंगा। कल दोषियों के घरवालों से बात करूंगा। उसके परिवार के लोगों से मिलूंगा। तब आगे की प्लानिंग करूंगा। 

कौन हैं जज योगेश खन्ना?

सितंबर 2013 में निर्भया (Nirbhaya) के दोषियों को फास्ट ट्रैक कोर्ट के अडिशनल सेशन जज योगेश खन्ना ने मौत की सजा सुनाई थी। सजा का ऐलान करते हुए योगेश खन्ना ने कहा था कि एक असहाय लड़की के साथ जघन्य अपराध हुआ है। लड़की के पास बचने का कोई उपाय नहीं था। इस केस में क्रूरता की सीमाएं तोड़ी गई हैं। अमानवीय बर्ताव हुआ है। ऐसे अपराध के लिए मौत से कम कोई सजा नहीं दी जा सकती है।

क्या है निर्भया (Nirbhaya) गैंगरेप और हत्याकांड?

दक्षिणी दिल्ली के मुनिरका बस स्टॉप पर 16-17 दिसंबर 2012 की रात पैरामेडिकल की छात्रा अपने दोस्त को साथ एक प्राइवेट बस में चढ़ी। उस वक्त पहले से ही ड्राइवर सहित 6 लोग बस में सवार थे। किसी बात पर छात्रा के दोस्त और बस के स्टाफ से विवाद हुआ, जिसके बाद चलती बस में छात्रा से गैंगरेप किया गया। लोहे की रॉड से क्रूरता की सारी हदें पार कर दी गईं। छात्रा के दोस्त को भी बेरहमी से पीटा गया। बलात्कारियों ने दोनों को महिपालपुर में सड़क किनारे फेंक दिया गया। पीड़िता का इलाज पहले सफदरजंग अस्पताल में चला, सुधार न होने पर सिंगापुर भेजा गया। घटना के 13वें दिन 29 दिसंबर 2012 को सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल में छात्रा की मौत हो गई।

कौन हैं निर्भया के दोषी?

1- निर्भया (nirbhaya) के पहले दोषी का नाम अक्षय ठाकुर है। यह बिहार का रहने वाला है। इसने अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी और दिल्ली चला आया। शादी के बाद ही 2011 में दिल्ली आया था। यहां वह राम सिंह से मिला। घर पर इस पत्नी और एक बच्चा है।

2- दूसरे दोषी को नाम मुकेश सिंह है। यह बस क्लीनर का काम करता था। जिस रात गैंगरेप की यह घटना हुई थी उस वक्त मुकेश सिंह बस में ही सवार था। गैंगरेप के बाद मुकेश ने निर्भया और उसके दोस्त को बुरी तरह पीटा था।

3- तीसरा दोषी पवन गुप्ता है। पवन दिल्ली में फल बेंचने का काम करता था। वारदात वाली रात वह बस में मौजूद था। पवन जेल में रहकर ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रहा है।

4- चौथा दोषी विनय शर्मा है। विनय जिम ट्रेनर का काम करता था। वारदात वाली रात विनय बस चला रहा था। इसने पिछले साल जेल के अंदर आत्‍महत्‍या की कोशिश की थी लेकिन बच गया।