अमेरिका ने भारत-पाकिस्तान युद्धविराम में मध्यस्थता का दावा किया, लेकिन भारत ने इसे खारिज कर दिया। जानें ट्रंप के दावों की असलियत और भारत का क्या कहना है।

Operation Sindoor: पहलगाम में हुए आतंकी हमले का बदला भारत की सेनाओं ने 6-7 मई की रात को ऑपरेशन सिंदूर से लिया। इसके बाद भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिन सैन्य टकराव चला। दोनों देशों ने एक दूसरे पर हमला नहीं करने पर सहमति जताई। इसके बाद लड़ाई रुकी है। इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान के बीच टकराव रुकवानी की क्रेडिट ली। उन्होंने तो यहां तक कह दिया कि भारत लड़ाई रोकने पर सहमत नहीं होता तो उससे कारोबार बंद कर देते। भारत के विदेश मंत्रालय ने डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बयान का जवाब दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सैन्य टकराव रोकने में किसी तीसरे देश की भागीदारी को खारिज किया है।

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आइए जानते हैं डोनाल्ड ट्रंप और मार्को रुबियो के दावे और उसपर विदेश मंत्रालय ने क्या कहा

दावा- अमेरिका ने की भारत-पाकिस्तान युद्धविराम में मध्यस्थता

हकीकत-भारत और पाकिस्तान के DGMOS के माध्यम से सीधे समझौते पर सहमति बनी। इंडियन एयरफोर्स के प्रभावी हमलों के बाद पाकिस्तान ने इसके लिए अनुरोध किया था।

दावा- परमाणु संघर्ष टाला

हकीकत- सिर्फ पारंपरिक क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई की गई।

दावा- भारत को व्यापार रोकने की धमकी दी।

हकीकत- ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अमेरिका के साथ कारोबार पर कोई चर्चा नहीं हुई।

दावा- कश्मीर पर मध्यस्थता करेंगे

हकीकत- बातचीत सिर्फ द्विपक्षीय होगी। मुद्दा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर को वापस लेना होगा।

दावा- भारत और पाकिस्तान को साथ लाए

हकीकत- भारत और पाकिस्तान को साथ लाने की कोई बात नहीं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय आतंकवाद पर भारत के साथ खड़ा है।

दावा- भारत और पाकिस्तान तटस्थ स्थान पर बातचीत करेंगे

हकीकत- इस तरह की बातचीत की कोई योजना नहीं है।