नई दिल्ली. नागरिकता कानून को लेकर जारी विरोधों के बीच भड़काऊ बयान देने के मामले में डॉ. कफील खान को कोर्ट ने जमानत दे दी है। इसके बावजूद वो जेल से नहीं निकल पाए हैं। क्योंकि योगी सरकार ने अब उन पर NSA के तहत कार्रवाई की है। योगी सरकार की इस कार्रवाई पर AIMIM अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने सवाल खड़ा करते हुए सरकार पर हमला बोला है। 

क्या कहा ओवैसी ने? 

ओवैसी ने कहा, "उत्तर प्रदेश में योगी सरकार बार-बार विरोधियों,  सताए हुए दलितों और मुस्लिमों के खिलाफ NSA का प्रयोग कर रहे हैं। एक डॉक्टर राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए कैसे खतरा हो सकता है। एक सीएम जो 'ठोक देंगे' और 'बोली नहीं तो गोली' जैसी भाषा का प्रयोग करते हैं असल में तो वो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हैं।"  

कोर्ट ने दी थी सशर्त जमानत 

डॉ. कफील खान को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में विवादित बयान देने के मामले में जनवरी महीने में मुंबई से गिरफ्तार किया गया था। उन पर पिछले साल 12 दिसंबर को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान भड़काऊ भाषण देने का आरोप है। शुक्रवार को डॉ. कफील खान जमानत पर रिहा होने वाले थे, लेकिन रासुका ने एक बार फिर से उनकी मुश्किलें बढ़ा दी है। डॉक्टर कफील खान के वकील ने कोर्ट में उनकी जमानत की अर्जी डाली थी, जिस पर 10 फरवरी को सीजेएम कोर्ट ने डॉ. कफील खान को जमानत दे दी थी। कोर्ट ने 60,000 रुपये के दो बांड के साथ सशर्त जमानत दी थी। साथ ही कहा था कि वो भविष्य में इस तरह की घटना को नहीं दोहराएंगे। वह फिलहाल मथुरा जेल में हैं। 

मुझको यूपी पुलिस पर भरोसा नहींः डॉ. कफील 

यूपी एसटीएफ ने डॉ. कफील खान को जनवरी में मुंबई से गिरफ्तार किया था। डॉक्टर कफील खान को गिरफ्तार करने के लिए यूपी एसटीएफ लगाने पर सवाल भी उठे थे। हालांकि उस समय पुलिस का कहना था कि न्यायिक प्रक्रिया के तहत डॉक्टर कफील खान की गिरफ्तारी हुई है। 

पुलिस के मुताबिक डॉक्टर कफील खान को हेट स्पीच की वजह से गिरफ्तार किया गया था। उनके खिलाफ मुकदमा भी दर्ज किया गया था। यूपी एसटीएफ द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद डॉक्टर कफील खान ने कहा था, 'मुझे गोरखपुर के बच्चों की मौत के मामले में क्लीन चिट दे दी गई थी। अब मुझको फिर से आरोपी बनाने की कोशिश की जा कर रही हैं। मैं महाराष्ट्र सरकार से अनुरोध करता हूं कि मुझे महाराष्ट्र में रहने दे। मुझको उत्तर प्रदेश पुलिस पर भरोसा नहीं है। 

क्या है राष्ट्रीय सुरक्षा कानून

रासुका यानी राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम-1980 देश की सुरक्षा के लिए सरकार को किसी व्यक्ति को हिरासत में रखने की शक्ति देता है। यह अधिकार केंद्र और राज्य सरकार दोनों को समान रूप से मिले हैं। रासुका लगाकर किसी भी व्यक्ति को एक साल तक जेल में रखा जा सकता है। हालांकि तीन महीने से ज्यादा समय तक जेल में रखने के लिए एडवाइजरी बोर्ड की मंजूरी लेनी पड़ती है। राष्ट्र की सुरक्षा के लिए खतरा होने और कानून व्यवस्था बिगड़ने की आशंका के आधार पर रासुका लगाया जा सकता है।